रायपुर। तीन राज्यों में संगठन सृजन अभियान के तहत जिलाध्यक्षों की खोज के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी इस प्रक्रिया की शुरुआत हो रही है। प्रदेश में मंडल और ब्लॉक स्तर पर अध्यक्ष तय किए जा चुके हैं और जल्द ही उनकी सूची जारी होगी। अब जिलाध्यक्षों के चयन की बारी है। इसके लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने 17 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है, जो प्रदेश के सभी संगठनात्मक जिलों में जाकर दावेदारों से चर्चा करेंगे और अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे【inc.in】।
प्रदेश के 41 जिलों में होगा बदलाव
संगठन सृजन अभियान के तहत छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सभी 41 संगठनात्मक जिलों के अध्यक्ष बदले जाएंगे। इसमें वे पदाधिकारी भी शामिल हैं जिन्हें कुछ माह पहले ही नियुक्तियां दी गई थीं। रिपोर्ट और फीडबैक के आधार पर ही नए जिलाध्यक्षों की घोषणा होगी।
पर्यवेक्षकों की सूची
पर्यवेक्षकों में सप्तगिरि उलका, अजय कुमार लल्लू, सुबोध कांत सहाय, उमंग सिंघार, आरसी खुंटिया, राजेश ठाकुर, विवेक बंसल, डॉ. नितिन राउत, श्याम कुमार बरवे, प्रफुल्ल गुदाढे, चरण सिंह सापरा, विकास ठाकरे, हीना कांवरे, रीता चौधरी, रेहाना रेयाज़ चिश्ती, अजमतुल्लाह हुसैनी और सीताराम लांबा शामिल हैं।
इंदिरा मॉडल से ताकतवर होंगे जिलाध्यक्ष
1970 के दशक के इंदिरा मॉडल पर आधारित इस प्रक्रिया से चुने गए जिलाध्यक्षों को संगठन में काफी ताकत मिलेगी। आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में टिकट वितरण में इनकी अहम भूमिका होगी। इतना ही नहीं, ये सीधे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और महासचिव केसी वेणुगोपाल जैसे शीर्ष नेताओं से भी मुलाकात कर सकेंगे।
चयन प्रक्रिया और शर्तें
पर्यवेक्षकों को पहले दिल्ली में ट्रेनिंग दी जाएगी। जिलों के दौरे के दौरान वे दावेदारों से बातचीत कर रिपोर्ट देंगे। हालांकि, रिपोर्ट का क्रॉस वेरिफिकेशन भी होगा ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। विशेष रूप से यह भी तय किया गया है कि संगठन सृजन अभियान के तहत चुना गया कोई भी जिलाध्यक्ष चुनाव नहीं लड़ सकेगा। यदि कोई नेता भविष्य में चुनाव लड़ना चाहता है तो उसकी दावेदारी स्वतः समाप्त हो जाएगी।
युवाओं और आरक्षित वर्गों को प्राथमिकता
अभियान के तहत तय नियमों के मुताबिक, जिलाध्यक्षों में 50 प्रतिशत पद एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को दिए जाएंगे। साथ ही, 50 साल से कम उम्र के नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी