जामगांव आर। अंचल में बार बार अघोषित बिजली कटौती और हाफ बिजली योजना में बदलाव ने जिले के उपभोक्ताओं और किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सितंबर माह के बिल में हजारों परिवारों को भारी-भरकम राशि चुकानी पड़ी है। पहले जहाँ उपभोक्ता 400 यूनिट तक हाफ बिल का लाभ ले रहे थे, वहीं अब नई व्यवस्था में केवल 100 यूनिट तक ही राहत दी जा रही है। परिणामस्वरूप आम परिवारों के बिल दोगुने से भी अधिक आ रहे हैं। क्षेत्र में बार बार बिजली बन्द होने से किसानों की नींद हराम कर दी है। सिंचाई कार्य प्रभावित होने से फसल पर संकट गहराने लगा है।
उपभोक्ता आक्रोशित – राहत के बजाय बोझ
बिजली बिल में अचानक हुई बढ़ोतरी से लोग आक्रोशित हैं। महंगाई के दौर में 100 यूनिट तक ही छूट मिलने से परिवारों का बजट बिगड़ गया है। लोगों का कहना है कि सरकार ने योजनाओं में बदलाव कर आम जनता की जेब पर बोझ डाल दिया है।
विभाग में कर्मचारियों की कमी ने बढ़ाई परेशानी
दुर्ग जिले के विद्युत वितरण केंद्रों में महज़ 399 तकनीकी कर्मचारियों के भरोसे 8.5 लाख उपभोक्ताओं की आपूर्ति चलाई जा रही है। पिछले पाँच वर्षों में तकनीकी कर्मचारियों की संख्या 50% तक घट गई है, जिससे मरम्मत कार्य प्रभावित है और उपभोक्ताओं को अतिरिक्त दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
जनता का सवाल – कब मिलेगा स्थायी समाधान?
लोगों का कहना है कि अगर राज्य सरकार और विभाग ने तत्काल कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में संकट और गहराएगा और शासन–प्रशासन को जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।
संपादकीय टिप्पणी
राज्य सरकार ने हाफ बिजली बिल वाली योजना में बदलाव कर उपभोक्ताओं को बोझ तले दबा दिया है। अघोषित कटौती, विभागीय लापरवाही और कर्मचारियों की भारी कमी ने मिलकर बिजली व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल सीधा है – क्या सरकार जनता को राहत देने आई थी या मुसीबत बढ़ाने? अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में बिजली का यह संकट सरकार के लिए राजनीतिक संकट भी बन सकता है।