पांच मैनपावर एजेंसियों को अतिरिक्त भुगतान का आरोप, EOW-ACB ने विशेष न्यायालय में पेश किए दस्तावेज
रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) से जुड़े 182.98 करोड़ रुपये के कथित मैनपावर भुगतान घोटाले में नया घटनाक्रम सामने आया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया के खिलाफ रायपुर स्थित विशेष न्यायालय में पूरक चालान पेश किया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि पांच मैनपावर एजेंसियों को कर्मचारियों के वेतन और अन्य मदों के नाम पर निर्धारित राशि से 182.98 करोड़ रुपये अधिक भुगतान किया गया।
भुगतान अभिलेखों में अनियमितता का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, मैनपावर एजेंसियों को किए गए भुगतान और कर्मचारियों को वास्तव में मिली रकम के बीच अंतर पाया गया। आरोप है कि ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम के भुगतान से संबंधित अभिलेखों में भी अनियमितताएं थीं। जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन के आधार पर कथित अतिरिक्त भुगतान की पड़ताल कर रही हैं।
अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में 152.40 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान का दावा
जांच एजेंसी के मुताबिक, अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल के दौरान मैनपावर एजेंसियों को 152.40 करोड़ रुपये का कथित अतिरिक्त भुगतान किया गया। जांच में एजेंसियों से 28 से 32 करोड़ रुपये तक नकद कमीशन के कथित लेन-देन की बात भी सामने आई है। इस रकम और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका को लेकर जांच की गई है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी।
ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज के भुगतान की भी जांच
जांच एजेंसी के अनुसार, ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज नाम की दो मैनपावर एजेंसियों को कुल 48.08 करोड़ रुपये का कथित अतिरिक्त भुगतान किया गया। जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि भुगतान संबंधी दस्तावेजों में दर्ज रकम और कर्मचारियों को वास्तव में दिए गए वेतन के बीच कितना अंतर था।
बीआर लोहिया के खिलाफ भी पूरक चालान
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अरुणपति त्रिपाठी न्यायिक अभिरक्षा में हैं, जबकि बीआर लोहिया के खिलाफ उनकी अनुपस्थिति में पूरक चालान पेश किया गया है। अब न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों, जांच एजेंसी के आरोपों और संबंधित पक्षों के बचाव के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी।
न्यायालय के फैसले पर रहेगी नजर
CSMCL मैनपावर भुगतान मामला कर्मचारियों के वेतन, एजेंसियों को किए गए भुगतान और कथित कमीशन लेन-देन से जुड़ा है। पूरक चालान पेश होने के बाद मामले में न्यायिक कार्यवाही आगे बढ़ेगी। जांच एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोपों को अभी न्यायालय में सिद्ध किया जाना शेष है और अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।