“दवा बनी ज़हर का खतरा!” — देशभर में 112 दवाएं फेल, छत्तीसगढ़ की 10 में खामियां, एक नकली घोषित

“दवा बनी ज़हर का खतरा!” — देशभर में 112 दवाएं फेल, छत्तीसगढ़ की 10 में खामियां, एक नकली घोषित

रायपुर, 26 अक्टूबर 2025। देश की दवा सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की सितंबर 2025 की रिपोर्ट में देशभर से 112 दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल पाई गई हैं। इनमें छत्तीसगढ़ की 10 दवाएं शामिल हैं, जिनमें एक दवा को नकली (Spurious) घोषित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य उपयोग में आने वाली एल्बेंडाजोल, पैरासिटामॉल और एमोक्सिलीन जैसी दवाओं में भी गंभीर गुणवत्ता दोष मिले हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेताया है कि ऐसी दवाएं न केवल बेअसर हैं बल्कि मरीजों के लिए स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ा सकती हैं।

◆ छत्तीसगढ़ में सबसे खराब स्थिति

राज्य में एल्बेंडाजोल के चार अलग-अलग बैच लगातार क्वालिटी टेस्ट में असफल रहे। यह कृमिनाशक दवा एएफएफवाई पैरेंटेरल्स (AFFY Parenterals) द्वारा निर्मित थी, जो “डिजोल्यूशन टेस्ट” में फेल हुई — यानी दवा शरीर में घुलकर असर दिखाने में विफल रही। इसके अलावा, मैकलियोड्स फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड की एक क्रीम — जिसमें क्लोबेटासोल, नियोमाइसिन और माइकोनाजोल शामिल हैं — को नकली (Spurious) घोषित किया गया। जांच में पाया गया कि यह असली ब्रांड की कॉपी थी और बिना वैध लाइसेंस के बनाई गई थी।

◆ दवाओं की सूची में और भी खामियां

रिपोर्ट के मुताबिक,एमोक्सिलीन टैबलेट (बैच CT2193) — Assay Test में फेल,HSN बॉयोटेक की पैरासिटामॉल टैबलेट (500 mg) — गुणवत्ता दोषयुक्त,एड केम फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड की एसेक्लोफेनिक-पैरासिटामॉल टैबलेट, स्वेफन फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड की डाइक्लोफैनिक-पैरासिटामॉल टैबलेट — Misbranded और Assay श्रेणी में असफल रहीं।

◆ देशव्यापी स्तर पर झटका

CDSCO और राज्य औषधि प्रयोगशालाओं की संयुक्त जांच में पाया गया कि 52 सैंपल केंद्रीय प्रयोगशालाओं में, और 60 सैंपल राज्य प्रयोगशालाओं में अमानक (NSQ) घोषित किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि रिपोर्ट यह संकेत देती है कि दवा निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली में गंभीर कमियां हैं।

◆ केंद्र और राज्य सरकार हरकत में

स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को इन मामलों की जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि “यह सिर्फ दवा की क्वालिटी नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा का मुद्दा है।”

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