
नवयौवन दर्शन के बाद निकलेगी भव्य रथयात्रा, श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम
YC न्यूज़ डेस्क। विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं का इंतजार अब समाप्त होने वाला है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के महास्नान के बाद 15 दिनों के एकांतवास (अनासर) और विशेष आयुर्वेदिक उपचार के पश्चात भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा पुनः भक्तों को दर्शन देंगे। मंदिर के कपाट 15 जुलाई को नवयौवन दर्शन (नेत्रोत्सव) के लिए खोले जाएंगे, जबकि 16 जुलाई से भव्य रथ यात्रा का शुभारंभ होगा। धार्मिक परंपरा के अनुसार देव स्नान पूर्णिमा पर 108 कलशों के पवित्र जल से स्नान के बाद भगवान को अस्वस्थ माना जाता है। इसके बाद उन्हें अनासर गृह में विश्राम कराया जाता है, जहां सेवायत पुजारी विशेष जड़ी-बूटियों के काढ़े और गुप्त भोग के साथ उनकी सेवा करते हैं। इस दौरान आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन पूरी तरह बंद रहते हैं।
रथ यात्रा से एक दिन पहले भगवान नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जिसे नेत्रोत्सव कहा जाता है। इसके अगले दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने-अपने विशाल रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। इस वर्ष रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई को बहुदा यात्रा (उल्टा रथ) के साथ संपन्न होगी। पुरी की रथ यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भगवान के तीनों विशाल रथ—नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन—किसी पशु की सहायता से नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं द्वारा मोटी रस्सियों से खींचे जाते हैं। यात्रा शुरू होने से पहले पुरी के गजपति महाराज स्वयं सोने की झाड़ू से रथ मार्ग की सफाई कर ‘छेरा पहरा’ की परंपरा निभाते हैं, जो भगवान के समक्ष सभी के समान होने का संदेश देती है।
रथ यात्रा को लेकर ओडिशा प्रशासन और श्री जगन्नाथ मंदिर समिति ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए मेडिकल कैंप, पेयजल व्यवस्था, पार्किंग स्थल तथा यातायात डायवर्जन की विशेष व्यवस्था की गई है। 16 जुलाई को भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी तथा ग्रैंड रोड पर केवल पैदल श्रद्धालुओं को ही प्रवेश की अनुमति