शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले शिक्षक ढालूराम साहू बहाल, शिक्षकों की एकजुटता और विरोध के आगे झुका विभाग

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले शिक्षक ढालूराम साहू बहाल, शिक्षकों की एकजुटता और विरोध के आगे झुका विभाग

धमतरी। व्हाट्सऐप पर शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करने पर निलंबित किए गए सहायक शिक्षक ढालूराम साहू को आखिरकार शिक्षा विभाग ने बहाल कर दिया है। उनका निलंबन प्रदेशभर के शिक्षकों में आक्रोश का विषय बन गया था, क्योंकि जिस मुद्दे को उन्होंने उठाया था, वह सीधे छात्रहित से जुड़ा था—“बच्चों को किताब बंटी नहीं, और हम राज्योत्सव मना रहे।”

गौरतलब है कि कुरूद विकासखंड के शासकीय नवीन प्राथमिक शाला नारी में पदस्थ शिक्षक ढालूराम साहू ने किताबों की कमी और स्कूलों में व्यवस्थागत खामियों पर व्हाट्सऐप स्टेटस के माध्यम से ध्यान आकर्षित किया था। यह टिप्पणी अधिकारियों को इतनी नागवार लगी कि बिना उनका जवाब सुने 3 नवंबर को उनका निलंबन आदेश जारी कर दिया गया। यह निर्णय शिक्षकों और संगठनों के बीच तीव्र विरोध का कारण बना। अनेक शिक्षक संगठनों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी दे दी। संघर्ष और एकता के बाद विभाग को अपना निर्णय बदलना पड़ा और 13 नवंबर को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने उनका निलंबन समाप्त करते हुए उन्हें पुनः उसी विद्यालय में पदस्थ कर दिया। शिक्षक ढालूराम साहू ने बहाली पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा—“यह एकता और सत्य की जीत है। संघीय शक्ति अमर रहे।”

निलंबन का कारण: शिक्षा व्यवस्था की खामियाँ उजागर करना

ढालूराम साहू का उद्देश्य स्कूलों में किताबों और संसाधनों की कमी से छात्रों की पढ़ाई पर पड़ने वाले असर को सामने लाना था। लेकिन विभाग ने इसे “शिक्षकीय गरिमा के विपरीत टिप्पणी” बताते हुए त्वरित दंडात्मक कार्रवाई कर दी। इस कदम ने शिक्षकों में यह सवाल खड़ा किया कि क्या अब छात्रहित की चिंता जताना भी अपराध माना जाएगा?

शिक्षक संगठनों की सख्त आपत्ति

सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन ने इस निलंबन का पुरजोर विरोध किया। फेडरेशन के अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि निलंबन तुरंत वापस नहीं लिया गया तो संगठन सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा। उनका कहना था—“क्या अब शिक्षकों को बच्चों के हित की बात लिखने का भी अधिकार नहीं? विभाग की यह कार्रवाई मनमानी और शिक्षक की मानहानि है। जिम्मेदार अधिकारियों पर भी जांच होनी चाहिए।”

एकजुटता का व्यापक समर्थन

फेडरेशन की ब्लॉक इकाइयों कुरूद, मगरलोड, नगरी, धमतरी सहित जिलाध्यक्षों, प्रांतीय पदाधिकारियों और सैकड़ों शिक्षकों ने इस अन्यायपूर्ण निर्णय के विरोध में मोर्चा संभाला। प्रांतीय प्रवक्ता हुलेश चंद्राकर, जिलाध्यक्ष दौलत ध्रुव, ब्लॉक अध्यक्ष लुकेश राम साहू, टेमनलाल साहू, ममता प्रजापति और अनेक पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा—“यदि व्यवस्थागत खामियों पर आवाज उठाना अपराध है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है।मामले में बढ़ते दबाव, शिक्षकों की एकता और सार्वजनिक समर्थन के बाद विभाग को ढालूराम साहू की बहाली का फैसला लेना पड़ा, जो शिक्षक समुदाय की जीत और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश देता है।

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