YC न्यूज़ डेस्क। भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सितारे महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) और सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह क्रिकेट का मैदान नहीं, बल्कि सेना का मोर्चा है। हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने टेरिटोरियल आर्मी (Territorial Army) को अधिक सक्रिय बनाने और इसके संचालन के लिए सेना प्रमुख को विशेष अधिकार देने का फैसला लिया है। इस फैसले के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या धोनी और तेंदुलकर जैसे मानद सैन्य रैंक धारकों को भी युद्ध की स्थिति में बॉर्डर पर ड्यूटी करनी पड़ सकती है?
महेंद्र सिंह धोनी टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल (मानद) की रैंक रखते हैं, जबकि सचिन तेंदुलकर को भारतीय वायुसेना ने ग्रुप कैप्टन (मानद) की उपाधि दी हुई है। धोनी इससे पहले 2019 में जम्मू-कश्मीर में अपनी बटालियन के साथ दो सप्ताह की ट्रेनिंग कर चुके हैं, जिसने उनकी सैन्य प्रतिबद्धता को दर्शाया था।
हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार, मानद रैंक का तात्पर्य प्रतीकात्मक सम्मान से होता है और ऐसे अधिकारी सैन्य ऑपरेशन्स में प्रत्यक्ष भूमिका नहीं निभाते। एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “मानद रैंक एक सम्मान है, न कि युद्धकालीन जिम्मेदारी। धोनी और तेंदुलकर का मुख्य योगदान युवाओं को प्रेरित करना और सिविल-मिलिट्री संबंधों को मजबूत करना है।”
रक्षा मंत्रालय के नए निर्देशों का मकसद टेरिटोरियल आर्मी की सक्रियता बढ़ाना और इसे युद्ध व आपात स्थितियों में बेहतर ढंग से तैयार करना है। यह निर्णय कई सवालों को जन्म दे रहा है, लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट किया गया है कि मानद रैंक धारक खिलाड़ियों को सीमावर्ती क्षेत्रों पर तैनात करने का कोई इरादा नहीं है।