दुर्ग जिला सरपंच संघ ने कलेक्टर को सौंपा 17 सूत्रीय मांगपत्र, पंचायतों को अधिक अधिकार और वित्तीय सशक्तिकरण की उठाई मांग-30 दिन में मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा प्रदर्शन

दुर्ग जिला सरपंच संघ ने कलेक्टर को सौंपा 17 सूत्रीय मांगपत्र, पंचायतों को अधिक अधिकार और वित्तीय सशक्तिकरण की उठाई मांग-30 दिन में मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा प्रदर्शन

आवास 2.0, मनरेगा, पंचायत निधि, पेंशन, गौठान, मानदेय, टैक्स एवं ग्राम विकास से जुड़े मुद्दों पर जल्द निर्णय की मांग

दुर्ग। जिला सरपंच संघ दुर्ग ने सोमवार को कलेक्टर को 17 सूत्रीय मांगपत्र सौंपकर ग्राम पंचायतों से जुड़े विभिन्न लंबित मुद्दों के शीघ्र निराकरण की मांग की है। यह मांगपत्र 20 जुलाई एवं 24 जुलाई 2026 को आयोजित जिला सरपंच संघ की बैठकों में दुर्ग, धमधा एवं पाटन विकासखंड के सरपंचों से प्राप्त सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। सरपंच संघ ने मांग की है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (आवास 2.0) में पात्र हितग्राहियों के नाम ग्रामसभा की अनुशंसा के आधार पर जोड़े जाएं तथा भूमि अभाव वाले हितग्राहियों को पहली मंजिल पर निर्माण की अनुमति दी जाए। पंचायतों को 50 लाख रुपये तक के कार्य स्वयं कराने का अधिकार मिले और बाहरी ठेकेदारी व्यवस्था समाप्त की जाए।

संघ ने कहा कि वर्ष 2011 के बाद जनगणना नहीं होने से अनेक पात्र वृद्ध, विधवा, दिव्यांग एवं परित्यक्ता पेंशन से वंचित हैं। इसलिए पेंशन के लिए ग्रामसभा को चयन का आधार बनाया जाए। साथ ही प्रत्येक सरपंच को प्रतिवर्ष 3 लाख रुपये की सरपंच निधि देने और 16वें वित्त आयोग की राशि वर्तमान जनसंख्या के आधार पर आवंटित करने की मांग की गई है। मांगपत्र में ग्रामसभा के प्रस्तावों पर सरपंचों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं करने, धारा-40 में संशोधन, गौठानों के बेहतर उपयोग, आबादी भूमि के त्वरित पट्टे, जेम पोर्टल व्यवस्था में सुधार तथा सभी ग्राम पंचायतों में मुफ्त इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी, आरईएस एवं जल जीवन मिशन जैसी एजेंसियों द्वारा किए गए कार्यों का पूर्णता प्रमाण पत्र ग्राम पंचायत से लेना अनिवार्य करने, राजस्व एवं पंचायत स्तर के प्रमाण पत्रों का शीघ्र निराकरण, मनरेगा कार्यों का कृषि सीजन में समायोजन तथा पंचायत कर्मचारियों के मानदेय का प्रावधान करने की मांग भी रखी गई है।

सरपंच संघ ने 1984 के रिकॉर्ड के अभाव में ग्रामसभा प्रस्ताव को जाति एवं निवास प्रमाण पत्र के लिए मान्यता देने, लघु खनिज से मिलने वाली डीएमएफ राशि प्रभावित पंचायतों को देने तथा पंचायतों में टैक्स एवं यूजर चार्ज की समान व्यवस्था लागू करने की भी मांग की है। मांगपत्र में सरपंचों का मासिक मानदेय 20 हजार रुपये, उपसरपंचों का 5 हजार रुपये, पंचों का 2 हजार रुपये तथा पांच वर्ष की सेवा पूर्ण करने के बाद सरपंचों को 5 हजार रुपये मासिक पेंशन देने की मांग भी प्रमुख रूप से शामिल है। जिला सरपंच संघ ने प्रशासन से इन सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार, संसाधन और वित्तीय मजबूती मिल सके।

जिला सरपंच संघ ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मांगपत्र में शामिल सभी 17 मांगों पर 30 दिवस के भीतर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो संघ जिला स्तर पर अनिश्चितकालीन अनशन और प्रदर्शन करेगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। सरपंच संघ ने कहा कि इन मांगों का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार, वित्तीय मजबूती और जनहित के कार्यों में गति प्रदान करना है, ताकि ग्रामीण विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। ज्ञापन सौपने के दौरान सरपंच सरपंच संघ अध्यक्षगण युगल किशोर साहू, ओमेश्वर यादव, रूपेंद्र शुक्ला, विनय चंद्राकर,दामिनी साहू, मनीष राजपूत सहित अन्य उपस्थित रहे।

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