जामगांव आर। पाटन ब्लॉक के ग्राम टेमरी में स्थित ब्रिटिशकालीन सिचाई निरीक्षण एवं विश्राम गृह अवैध कब्जे की चपेट में आ चुका है। तांदुला सर्वेक्षण एवं अनुसंधान उपसंभाग क्रमांक 1 के अंतर्गत आने वाला यह ऐतिहासिक भवन अब संरक्षण के लिए संघर्ष कर रहा है। जानकारी के अनुसार जामगांव आर से धमतरी मुख्य जिला मार्ग से सटे इस भवन के मुख्य द्वार पर गांव के कुछ लोगों ने शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर मकान का निर्माण कर लिया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि कब्जाधारियों ने प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि से मकान बनवा रहे हैं और उन्हें योजना की किस्तें भी जारी कर दी गई हैं। बावजूद इसके न तो तत्कालीन सरपंच ने और न ही वर्तमान सरपंच ने इस अवैध निर्माण को रोकने की पहल की। अब हालात यह हो गए हैं कि कब्जाधारी दुकानें भी बना रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्रशासन और पंचायत विभाग की गंभीर लापरवाही का उदाहरण है।
गौरतलब है कि इस पुराने विश्राम गृह का डेढ़ वर्ष पूर्व लाखों रुपये की लागत से पुनर्निर्माण किया गया था। बावजूद इसके सिचाई विभाग और राजस्व विभाग मिलकर भी इस सरकारी धरोहर को सुरक्षित रख पाने में अब तक विफल साबित हुए हैं । वर्तमान में भवन का मुख्य द्वार अवैध निर्माण के कारण मुख्य सड़क से दिखाई ही नहीं देता। जानकारी के अनुसार उक्त विश्राम गृह के चारों ओंर आहाता निर्माण की स्वीकृति भी प्रक्रियाधीन है लेकिन बेजा कब्जा के कारण यह कैसे बनेगा इस पर संशय है । जानकारी के अनुसार अतिक्रमणकारियों को एक बड़े स्थानीय नेता का सरंक्षण प्राप्त होने से इनके हौसले बुलंद है और वे प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं ।
सिचाई विभाग के सब इंजीनियर मुकेश अहीर ने बताया कि कब्जाधारियों को समझाइश और नोटिस देने के बाद भी वे हटने को तैयार नहीं हैं। विभाग ने एसडीएम पाटन को पत्र भेजा है और एसडीएम ने नायब तहसीलदार को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं सरपंच वरुण देव का कहना है कि जब विभाग कार्रवाई कर रहा है तो पंचायत को हस्तक्षेप की जरूरत नहीं। स्थानीय ग्रामीणों ने इस पूरे मामले को प्रशासनिक उदासीनता करार दिया है।