दुर्ग में एफआईआर प्रक्रिया हुई पूरी तरह डिजिटल, शिकायतकर्ता और विवेचक दोनों करेंगे ई-साइन; प्रदेश का पहला जिला बना

दुर्ग में एफआईआर प्रक्रिया हुई पूरी तरह डिजिटल, शिकायतकर्ता और विवेचक दोनों करेंगे ई-साइन; प्रदेश का पहला जिला बना

दुर्ग, 23 जुलाई। दुर्ग जिले ने पुलिस व्यवस्था के डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। इसके साथ ही दुर्ग छत्तीसगढ़ का पहला जिला बन गया है, जहां एफआईआर पर विवेचक के साथ-साथ शिकायतकर्ता के भी ई-साइन (डिजिटल हस्ताक्षर) किए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिले के सभी विवेचक अब शत-प्रतिशत ई-साइन के माध्यम से एफआईआर की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। हाल ही में भिलाई नगर थाना में पुलिस मुख्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई ई-पेन की सहायता से एक शिकायतकर्ता का पहला सफल ई-साइन कराया गया। इसके साथ ही जिले में डिजिटल एफआईआर प्रणाली का पूर्ण क्रियान्वयन शुरू हो गया है।

एफआईआर प्रक्रिया होगी अधिक तेज और पारदर्शी

पुलिस का कहना है कि नई व्यवस्था से एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और पारदर्शी हो गई है। ई-साइन के उपयोग से दस्तावेजों की सुरक्षा बढ़ेगी, रिकॉर्ड का दीर्घकाल तक सुरक्षित संरक्षण संभव होगा और आवश्यकता पड़ने पर दस्तावेज आसानी से उपलब्ध कराए जा सकेंगे। साथ ही कागज की खपत कम होने से पुलिस व्यवस्था पेपरलेस प्रणाली की ओर भी अग्रसर होगी।

प्रदेश के थानों को उपलब्ध कराए गए ई-पेन

दुर्ग पुलिस के अनुसार पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के थानों को ई-पेन उपलब्ध कराए हैं। इन्हीं की सहायता से एफआईआर पर डिजिटल हस्ताक्षर किए जा रहे हैं। अब एफआईआर दर्ज करते समय विवेचक के साथ शिकायतकर्ता भी ई-साइन करेगा, जिससे पूरी प्रक्रिया तकनीक आधारित और अधिक सुविधाजनक बन गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल एफआईआर प्रणाली से नागरिकों को आधुनिक एवं बेहतर पुलिस सेवाएं मिलेंगी। रिकॉर्ड अधिक सुरक्षित रहेगा, दस्तावेजों के रखरखाव में आसानी होगी तथा एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित होगी।

नई व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएं
एफआईआर दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होगी।
विवेचक और शिकायतकर्ता दोनों ई-साइन के माध्यम से हस्ताक्षर करेंगे।
कागज का उपयोग कम होगा और रिकॉर्ड अधिक सुरक्षित रहेगा।
दस्तावेजों का संरक्षण एवं उपलब्धता पहले से अधिक आसान होगी।
एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनेगी।
नागरिकों को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक पुलिस सेवाओं का लाभ मिलेगा।

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