
दुर्ग, 23 जुलाई। दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पतोरा की प्रधान पाठिका ममता शांडिल्य को छात्रों से मारपीट, अभद्र भाषा के प्रयोग एवं दुर्व्यवहार के आरोपों की विभागीय जांच में पुष्टि होने के बाद निलंबित कर दिया गया है। शिक्षा संभाग दुर्ग के संयुक्त संचालक ने गुरुवार को निलंबन आदेश जारी किया। जानकारी के अनुसार ग्रामीणों, पालकों एवं जनप्रतिनिधियों ने प्रधान पाठिका के विरुद्ध छात्र-छात्राओं से मारपीट, अपमानजनक भाषा का प्रयोग तथा अनुचित व्यवहार किए जाने की शिकायत कलेक्टर एवं शिक्षा विभाग से की थी। शिकायत के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) दुर्ग ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर मामले की जांच कराई। जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने बताया कि जांच दल ने विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों, पालकों, ग्रामीणों, शिक्षकों तथा प्रधान पाठिका के बयान दर्ज किए। दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर तैयार रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होने के बाद प्रतिवेदन संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय को भेजा गया, जिसके आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई।
छात्राओं में भय का माहौल बनने का उल्लेख
निलंबन आदेश में उल्लेख किया गया है कि प्रधान पाठिका के व्यवहार के कारण विद्यालय की छात्राओं में भय एवं असुरक्षा का वातावरण निर्मित हो गया था। साथ ही पालकों और जनप्रतिनिधियों में भी उनके प्रति असंतोष था, जिससे विद्यालय का शैक्षणिक एवं अनुशासनात्मक वातावरण प्रभावित हुआ।
आचरण नियमों के उल्लंघन का आरोप
संभागीय संयुक्त संचालक ने आदेश में कहा है कि प्रधान पाठिका का आचरण शासकीय दायित्वों के प्रति गैर-जिम्मेदाराना, लापरवाहीपूर्ण एवं स्वेच्छाचारी पाया गया, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का गंभीर उल्लंघन है। इसी आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, दुर्ग निर्धारित किया गया है।
18 जुलाई की घटना के बाद बढ़ा विवाद
ग्रामीणों के अनुसार 18 जुलाई को एक छात्र के साथ कथित रूप से मारपीट की घटना के बाद मामला तूल पकड़ गया। आरोप है कि छात्र को कांटेदार डंडे से पीटा गया, जिससे उसके हाथ में चोट आई। इस घटना के बाद ग्रामीण, पालक, जनप्रतिनिधि और स्कूली बच्चे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे और कार्रवाई की मांग की।
छात्रों ने लगाए अपमानजनक व्यवहार के आरोप
जांच के दौरान कुछ विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि प्रधान पाठिका उनसे अपमानजनक भाषा में बात करती थीं। एक छात्र ने आरोप लगाया कि उसके शारीरिक बनावट का मजाक उड़ाया जाता था, जबकि कुछ छात्राओं ने उनसे चाय बनाने और निजी कार्य कराए जाने की शिकायत की। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन आरोपों से संबंधित आगे की विभागीय प्रक्रिया नियमानुसार जारी रहेगी।
मार्च में भी हुई थी शिकायत
ग्रामीणों के अनुसार प्रधान पाठिका के विरुद्ध मार्च 2026 में भी शिक्षा मंत्री, जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत दी गई थी। हालिया घटना के बाद मामले की पुनः जांच कराई गई और विभागीय कार्रवाई की गई।
12 बिंदुओं पर दर्ज हुई शिकायत
शिकायत में छात्रों से मारपीट, गाली-गलौज, कथित जातिसूचक टिप्पणी, शिक्षकों से दुर्व्यवहार, विद्यार्थियों से निजी कार्य कराने, बिना अनुमति अनुपस्थित रहने, शैक्षणिक कार्य प्रभावित करने, सरकारी सामग्री के कथित दुरुपयोग तथा अन्य प्रशासनिक अनियमितताओं सहित कुल 12 बिंदुओं पर आरोप लगाए गए थे। इन बिंदुओं की विभागीय जांच की गई। निलंबन आदेश के साथ जिला शिक्षा अधिकारी, दुर्ग को एक सप्ताह के भीतर आरोप पत्र तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग ने कहा है कि मामले में आगे की विभागीय कार्रवाई नियमानुसार जारी रहेगी। डीईओ अरविंद मिश्रा ने बताया कि विद्यार्थियों के साथ शारीरिक दंड एवं मानसिक प्रताड़ना पर पूर्ण प्रतिबंध है और ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।