रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस वर्ष 2026 में पुलिसिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बीट सिस्टम पर विशेष फोकस करेगी। इसके तहत थाना क्षेत्रों को छोटे-छोटे बीट में बांटा जाएगा और हर बीट के लिए एक प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। उस इलाके में होने वाली हर घटना की सीधी जवाबदेही संबंधित बीट प्रभारी की होगी। पुलिस का मानना है कि इससे जमीनी स्तर पर निगरानी मजबूत होगी और अपराध नियंत्रण में तेजी आएगी। बीट प्रभारी अपने इलाके की गतिविधियों, अपराधियों और संदिग्धों पर लगातार नजर रखेगा। इसके साथ ही पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का अधिक इस्तेमाल करेगी। नए सॉफ्टवेयर और आधुनिक उपकरणों के जरिए जांच और निगरानी को तकनीकी रूप से मजबूत किया जाएगा।
DGP-IG कॉन्फ्रेंस के बाद 107 बिंदुओं का एजेंडा
पिछले साल नवंबर में हुई डीजीपी-आईजी कॉन्फ्रेंस के बाद पुलिसिंग सुधार को लेकर 107 बिंदुओं का विस्तृत एजेंडा तैयार किया गया है। यह एजेंडा जनवरी में सभी राज्यों को भेजा गया है, जिस पर एक साल तक काम किया जाएगा। वर्ष 2026 के अंत में होने वाली अगली डीजीपी-आईजी कॉन्फ्रेंस में इसकी समीक्षा की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस साल बीट सिस्टम को लेकर गंभीरता से काम किया जाएगा। हर थाना और पुलिस विंग में बीट सिस्टम लागू होगा। थाना और क्राइम ब्रांच में इसे तत्काल प्रभाव से मजबूत करने की तैयारी है। हालांकि कई शहरों में यह व्यवस्था पहले से लागू है, लेकिन अब इसे नए सिरे से प्रभावी बनाया जाएगा।
निगरानी बदमाशों पर कड़ी नजर, जनता से संवाद
बीट प्रभारी निगरानी बदमाशों और गुंडा तत्वों पर नजर रखेंगे और इलाके के लोगों से नियमित संवाद बनाए रखेंगे। साथ ही थाने के प्रत्येक कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
AI से ट्रैफिक और साइबर क्राइम पर सख्ती
ट्रैफिक प्रबंधन में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जाएगा। AI के जरिए वाहनों की ट्रेसिंग-ट्रैकिंग, भीड़ की निगरानी और ट्रैफिक नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इसके लिए थानों के स्टाफ को AI तकनीक की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। साइबर सेल और क्राइम ब्रांच भी AI आधारित टूल्स का उपयोग करेंगी, जिससे आरोपियों की पहचान, गिरफ्तारी और ब्लाइंड केस सुलझाने में मदद मिलेगी। पुलिस का दावा है कि आधुनिक तकनीक से जांच प्रक्रिया तेज और अधिक सटीक होगी।
सूखे नशे के नेटवर्क पर प्रहार
डीजीपी कॉन्फ्रेंस में सूखे नशे को लेकर लंबी चर्चा हुई थी। सभी राज्यों को इसके खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ में रायपुर समेत 10 जिलों में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है, ताकि नशे की सप्लाई चेन तोड़ी जा सके और इसकी मांग कम की जा सके। आगे चलकर सूखे नशे के खिलाफ स्पेशल फोर्स को और मजबूत किया जाएगा।
ATS को मिलेगा नया बल
सभी राज्यों को एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ में 24 साल बाद वर्ष 2025 में ATS थाना शुरू किया गया है, जहां कार्रवाई भी प्रारंभ हो चुकी है। आने वाले समय में भर्ती प्रक्रिया के जरिए मैनपावर बढ़ाई जाएगी और हाईटेक सॉफ्टवेयर व सिस्टम खरीदे जाएंगे।
इन मुद्दों पर रहेगा खास जोर
छत्तीसगढ़ पुलिस महिला संबंधी अपराध, मानव तस्करी, साइबर क्राइम, बेसिक और सामुदायिक पुलिसिंग, नशा मुक्ति अभियान और बाल अपराध की रोकथाम जैसे मुद्दों पर भी विशेष ध्यान देगी।
CM और डिप्टी CM ने तय किया रोडमैप
27 जनवरी को नवा रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने डीजीपी कॉन्फ्रेंस की रिपोर्ट को लेकर अहम बैठक ली थी। बैठक में 107 बिंदुओं की रिपोर्ट पर चर्चा कर इसके क्रियान्वयन का रोडमैप तय किया गया। तय किया गया है कि एक साल में इन बिंदुओं पर काम पूरा कर इसकी रिपोर्ट अगली डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत की जाएगी।