छत्तीसगढ़ में पहली बार सरकारी स्कूलों का ‘क्वालिटी टेस्ट’: अब बच्चों और शिक्षकों की साथ होगी परीक्षा, ग्रेडिंग से तय होगा शिक्षा स्तर

छत्तीसगढ़ में पहली बार सरकारी स्कूलों का ‘क्वालिटी टेस्ट’: अब बच्चों और शिक्षकों की साथ होगी परीक्षा, ग्रेडिंग से तय होगा शिक्षा स्तर

रायपुर । छत्तीसगढ़ में अब सरकारी स्कूलों की पढ़ाई और शिक्षण गुणवत्ता को परखने का नया तरीका अपनाया जा रहा है। राज्य में पहली बार बच्चों और शिक्षकों दोनों का एक साथ टेस्ट लिया जाएगा। यह परीक्षण मुख्यमंत्री गुणवत्ता अभियान के तहत शुरू हो रहा है, जिसके पहले चरण की शुरुआत आज से हो गई है। राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के विशेषज्ञों ने इस टेस्ट के लिए प्रश्न तैयार किए हैं। बच्चों के लिए सवाल उनकी कक्षाओं के अनुरूप होंगे, वहीं शिक्षकों के लिए उन विषयों पर प्रश्न रखे गए हैं जिन्हें वे पढ़ा रहे हैं। टेस्ट में सामान्य ज्ञान, पढ़ने-लिखने की क्षमता और समझदारी पर विशेष जोर रहेगा।

कैसे होगा मूल्यांकन
विशेषज्ञों की टीम स्कूल पहुंचकर बच्चों से किताबें पढ़वाएगी, ब्लैकबोर्ड पर लिखवाकर उनकी लेखन क्षमता जांचेगी और शिक्षकों की उपस्थिति व पढ़ाने के तौर-तरीकों का निरीक्षण करेगी। इसके आधार पर स्कूलों और विद्यार्थियों को A, B, C या D ग्रेड दी जाएगी। परीक्षण के दौरान स्कूल की बुनियादी सुविधाएं भी जांची जाएंगी — जैसे बैठने की व्यवस्था, पीने के पानी की उपलब्धता, साफ-सफाई और वॉशरूम की स्थिति।

चार अलग-अलग टूल से होगा टेस्ट
राज्य सरकार ने मूल्यांकन के लिए चार स्तर तय किए हैं
• पहली से पाँचवीं कक्षा के लिए पहला टूल
• छठवीं से आठवीं कक्षा के लिए दूसरा टूल
• नौवीं और दसवीं के लिए तीसरा टूल
• ग्यारहवीं और बारहवीं के लिए चौथा टूल
48 हजार से ज्यादा स्कूलों में टेस्ट
छत्तीसगढ़ के करीब 48 हजार प्राथमिक, माध्यमिक, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में यह टेस्ट लिया जाएगा। प्रत्येक जिले में विशेषज्ञों और आसपास के वरिष्ठ नागरिकों की टीम बनाई गई है। इनमें अन्य स्कूलों के अनुभवी शिक्षक भी शामिल रहेंगे। पहले चरण में ये टीमें 6 से 8 अक्टूबर के बीच अपनी सुविधा अनुसार स्कूलों का दौरा करेंगी। जहां कमियां मिलेंगी, वहां सुधार के लिए जनवरी तक का समय दिया जाएगा। फिर जनवरी के आखिरी या फरवरी के पहले सप्ताह में दोबारा मूल्यांकन होगा।

कम ग्रेड वाले स्कूलों की होगी जांच
जिन स्कूलों को C या D ग्रेड मिलेगी, वहां यह पता लगाया जाएगा कि बच्चे पढ़ाई में पीछे क्यों हैं। यह जांच की जाएगी कि कारण बच्चों की उपस्थितिशिक्षकों की जिम्मेदारी, या सुविधाओं की कमी से जुड़ा है या नहीं। इन कारणों को दूर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे और अगले सत्र में दोबारा टेस्ट लेकर यह देखा जाएगा कि बच्चों की सीखने की क्षमता में सुधार हुआ या नहीं।

सरकार का उद्देश्य
मुख्यमंत्री गुणवत्ता अभियान का मकसद है —
• सरकारी स्कूलों की शिक्षा स्तर में सुधार,
• शिक्षकों में जिम्मेदारी और प्रदर्शन की भावना बढ़ाना,
• और बच्चों की सीखने की क्षमता को वैज्ञानिक ढंग से आंकना।

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