दुर्ग-भिलाई- YC न्यूज़ डेस्क। भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के निजीकरण और बिक्री की अटकलों को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत तेज हो गई है। बीएसपी प्रबंधन की ओर से बिक्री संबंधी खबरों को अफवाह और भ्रामक बताए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अडानी समूह की नजर भिलाई स्टील प्लांट की रेल मिल पर है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बघेल ने बीएसपी प्रबंधन के खंडन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जनसंपर्क विभाग ने किसकी अनुमति से बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि बीएसपी की बिक्री या निजीकरण से संबंधित निर्णय भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए प्रबंधन को स्पष्ट करना चाहिए कि बयान केंद्र सरकार की अनुमति से जारी किया गया था या नहीं।
‘बीएसपी प्रबंधन बताए, किसकी अनुमति से जारी किया खंडन’
मीडिया से चर्चा के दौरान भूपेश बघेल ने कहा कि बीएसपी का जनसंपर्क विभाग न तो स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) का आधिकारिक प्रवक्ता है और न ही इस्पात मंत्रालय का। ऐसे में बिक्री संबंधी खबरों को भ्रामक बताने वाले बयान के आधार को स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि बयान भारत सरकार की अनुमति के बिना जारी किया गया है, तो संबंधित अधिकारी को भिलाई की जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। बघेल ने यह भी सवाल उठाया कि अडानी समूह से जुड़े लोगों के भिलाई स्टील प्लांट पहुंचने का उद्देश्य क्या था। उन्होंने आरोप लगाया कि संयंत्र की रेल मिल को खरीदने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने आने की जानकारी नहीं है।
भिलाई की रेल मिल को लेकर जताई आशंका
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उन्हें मिली जानकारी के अनुसार, अडानी समूह की नजर बीएसपी की एकमात्र रेल मिल पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में सार्वजनिक क्षेत्र की कई औद्योगिक परिसंपत्तियों को लेकर निजीकरण की आशंकाएं बढ़ी हैं। बघेल ने पावर प्लांट, ऑक्सीजन प्लांट और सिंटर प्लांट से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भिलाई के औद्योगिक ढांचे और सार्वजनिक संपत्तियों को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने बालको, नगरनार स्टील प्लांट और अन्य सरकारी परिसंपत्तियों का जिक्र करते हुए भी केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, कोयला, बिजली, लौह अयस्क और इस्पात जैसे क्षेत्रों में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका के बीच बीएसपी को लेकर उठ रही आशंकाओं को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
देवेंद्र यादव ने 10 हजार रहवासियों के नोटिस पर उठाए सवाल
भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने भी बीएसपी प्रबंधन के खंडन पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि संयंत्र के निजीकरण या बिक्री की कोई योजना नहीं है, तो करीब 10 हजार रहवासियों को मकान खाली करने के नोटिस दिए जाने के पीछे क्या कारण है? यादव ने कहा कि प्रबंधन को आवास खाली कराने की कार्रवाई और संयंत्र के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने इसे बीएसपी की बसाहट और कर्मचारियों के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। हालांकि, आवास खाली करने के नोटिस और संयंत्र की कथित बिक्री के बीच संबंध होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बीजेपी ने पोस्टर जारी कर भूपेश बघेल पर साधा निशाना
बीएसपी प्रबंधन के बयान के बाद भाजपा ने भी सोशल मीडिया पर पोस्टर जारी कर भूपेश बघेल पर निशाना साधा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बघेल ने कहा कि उन्होंने भिलाई स्टील प्लांट को लेकर सवाल उठाए थे, लेकिन भाजपा के पोस्टर में ट्रेन और रेल पटरी दिखाई गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पोस्टर से भी रेल मिल को लेकर उनकी आशंका का मुद्दा सामने आता है। भाजपा विधायक रिकेश सेन के घर के बाहर धरने को लेकर पूछे गए सवाल पर बघेल ने कहा कि विरोध करने वालों का स्वागत किया जाएगा, लेकिन पहले यह सुनिश्चित होना चाहिए कि भिलाई स्टील प्लांट नहीं बिकेगा।
बीएसपी के भविष्य पर राजनीतिक टकराव तेज
बीएसपी के निजीकरण और बिक्री को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस नेताओं ने संयंत्र की संपत्तियों और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि बीएसपी प्रबंधन बिक्री संबंधी खबरों को अफवाह और भ्रामक बता चुका है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या बीएसपी के निजीकरण या रेल मिल की बिक्री को लेकर कोई आधिकारिक प्रस्ताव मौजूद है? भूपेश बघेल के आरोपों और प्रबंधन के खंडन के बीच केंद्र सरकार, सेल प्रबंधन और इस्पात मंत्रालय की ओर से स्थिति स्पष्ट होने पर ही मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।