YC न्यूज़ डेस्क। माओवादी संगठन के पूर्व शीर्ष नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने आत्मसमर्पण के बाद जारी अपने वीडियो संदेश में संगठन के मौजूदा नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भूपति ने कहा कि वर्तमान माओवादी नेता “कठमुल्लावादी और कट्टरवादी सोच” से प्रेरित होकर फैसले ले रहे हैं, जिससे संगठन अपनी वैचारिक दिशा से भटक चुका है और जनता से पूरी तरह कट गया है।
भूपति ने कहा कि “हिंसा और हथियार के बल पर संघर्ष ने संगठन को कमजोर किया है। जनता का समर्थन ही संगठन की सबसे बड़ी ताकत थी, लेकिन आज यह भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है।”
गढ़चिरोली में 60 साथियों सहित पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने वाले भूपति ने बताया कि माओवादी आंदोलन अब जनहित और समानता के मुद्दों से भटककर सत्ता और दमन के एजेंडे पर काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय समिति के कुछ नेता “हथियार आधारित आंदोलन” को ही समाधान मानते हैं, जबकि यह सोच अब “पुरानी और असफल” साबित हो चुकी है।
भूपति ने आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व आदिवासी समुदायों के जीवन को नुकसान पहुंचा रहा है, क्योंकि वे वास्तविक विकास और संवाद के बजाय केवल हिंसा पर निर्भर हैं। भूपति के अनुसार, संगठन के पतन की सबसे बड़ी वजह यही है कि उसने जनता से संवाद खत्म कर दिया।“हमने खुद ही जनता को अपने से दूर धकेल दिया — यही माओवादी आंदोलन की सबसे बड़ी विफलता है।”
भूपति का यह बयान माओवादी नेटवर्क की आंतरिक टूट और वैचारिक विभाजन का बड़ा संकेत माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां उनके खुलासों का विश्लेषण कर रही हैं और सूत्रों के अनुसार, इससे नक्सल मोर्चे पर सरकार को कई रणनीतिक सफलताएँ मिल सकती हैं। भूपति, जो कभी संगठन के केंद्रीय रीजनल ब्यूरो सचिव और आधिकारिक प्रवक्ता रहे हैं, अपने संगठनात्मक नामों — भूपति, सोनू, और अभय — से जाने जाते थे। उनके आत्मसमर्पण को न केवल माओवादी आंदोलन के लिए झटका माना जा रहा है, बल्कि यह भी संकेत है कि शीर्ष स्तर पर असंतोष और वैचारिक संकट तेजी से बढ़ रहा है।