
रायपुर, 1 अगस्त। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दिल्ली दौरे में केंद्र सरकार के चार वरिष्ठ मंत्रियों के साथ हुई बैठकों से छत्तीसगढ़ को डिजिटल कनेक्टिविटी, ग्रामीण सड़क, बिजली और खाद्यान्न परिवहन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सौगातें मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम और उपभोक्ता मामले एवं खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी से अलग-अलग मुलाकात की।
आदिवासी इलाकों में लगेंगे 2305 मोबाइल टॉवर
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य के दूरस्थ, आदिवासी और सीमावर्ती क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी मजबूत करने पर चर्चा की। डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) योजना के तहत 2305 मोबाइल टॉवर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने शीघ्र मंजूरी का भरोसा दिया। केंद्र सरकार पहले ही 577 अतिरिक्त टॉवरों को स्वीकृति दे चुकी है। इनमें से 489 स्थानों के लिए राज्य सरकार ने बीएसएनएल को भूमि संबंधी एनओसी जारी कर दी है और वहां टॉवर लगाने का कार्य शुरू हो चुका है। शेष 88 स्थानों के लिए प्रक्रिया तेजी से जारी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी से ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, ई-गवर्नेंस और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। वहीं सिंधिया ने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य देश के हर नागरिक को विश्वसनीय और आधुनिक डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना है।
बस्तर के लिए अरुणाचल मॉडल पर सड़क योजना की मांग
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर बस्तर के दुर्गम और आदिवासी क्षेत्रों के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में विशेष प्रावधान की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि अरुणाचल प्रदेश की तर्ज पर 500 मीटर के बजाय 10 किलोमीटर की परिधि में स्थित बसाहटों को एक क्लस्टर माना जाए। मुख्यमंत्री का कहना था कि इससे जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों के अधिक गांव सड़क नेटवर्क से जुड़ सकेंगे। केंद्रीय मंत्री चौहान ने इस प्रस्ताव पर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया और छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास, जीरामजी योजना तथा पीएम आवास योजना के क्रियान्वयन की सराहना की। बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी मौजूद रहे।
पूर्व नक्सल प्रभावित 461 गांवों तक पहुंचेगी ग्रिड बिजली
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने बस्तर संभाग के सात जिलों के 461 पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों तक ग्रिड बिजली पहुंचाने के लिए 435 करोड़ रुपये की विशेष केंद्रीय सहायता की मांग की। यह प्रस्ताव धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत तैयार किया गया है। पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 973 करोड़ रुपये बताई गई है। मुख्यमंत्री ने विस्तृत प्रस्ताव केंद्रीय मंत्री को सौंपते हुए कहा कि बिजली पहुंचने से इन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और रोजगार के अवसरों में बड़ा बदलाव आएगा। जुएल ओराम ने आश्वासन दिया कि स्वीकृति प्रक्रिया में धन की कमी बाधा नहीं बनेगी।
चावल उठाव और रेलवे रैक बढ़ाने का आग्रह
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से भी मुलाकात की। उन्होंने छत्तीसगढ़ से 5 लाख मीट्रिक टन चावल के शीघ्र उठाव तथा हर महीने पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध कराने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि समय पर चावल उठाव होने से परिवहन व्यवस्था तेज होगी, गोदामों में नई फसल के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध रहेगी और किसानों से धान खरीदी की प्रक्रिया अधिक सुचारु रूप से संचालित की जा सकेगी।
विकास के चार मोर्चों पर केंद्र से सहयोग
दिल्ली में हुई इन चार महत्वपूर्ण बैठकों को राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए विकास के चार प्रमुख मोर्चों—डिजिटल कनेक्टिविटी, ग्रामीण सड़क, बिजली विस्तार और खाद्यान्न परिवहन—पर केंद्र से मजबूत सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि इन प्रस्तावों पर शीघ्र निर्णय होने से विशेष रूप से बस्तर और अन्य सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।