
दुर्ग। छत्तीसगढ़ के एक हजार से अधिक अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर चुके हैं। पिछले 20 दिनों से दुर्ग के हिंदी भवन के सामने धरने पर बैठे शिक्षकों ने सोमवार को संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान कार्य के लिए समान वेतन और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निवास का घेराव करने का प्रयास किया। प्रदर्शन के दौरान बारिश के बीच रैली निकाली गई, रात में फ्लैशलाइट जलाकर विरोध दर्ज कराया गया और देर रात तक शिक्षक मंत्री के बंगले के बाहर सड़क पर ही डटे रहे। मंत्री से मुलाकात नहीं होने के बाद प्रदर्शनकारी पिछले 28 घंटे से शिक्षा मंत्री के निवास के बाहर धरने पर बैठे हैं। लगातार बारिश के बावजूद शिक्षक रेनकोट और छाते के सहारे अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत मंत्री निवास के आसपास बैरिकेडिंग भी की गई है।
राज्य अतिथि शिक्षक संघ के हड़ताल प्रमुख एवं मुख्य संरक्षक धर्मेंद्र दास वैष्णव ने कहा कि प्रदेश के अतिथि शिक्षक पिछले 11 वर्षों से दूर-दराज और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षा का दायित्व निभा रहे हैं, लेकिन आज भी वे केवल मानदेय के भरोसे कार्य करने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उन्हें प्रतिमाह लगभग 20 हजार रुपये मानदेय मिलता है, जिससे परिवार का भरण-पोषण, किराया, बिजली-पानी, आवागमन और अन्य जरूरी खर्च पूरे करना बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है कि परिवार की मदद करने के बजाय स्वयं घर से आर्थिक सहायता लेनी पड़ती है। यदि परिवार में कोई बीमार हो जाए तो आर्थिक संकट और गहरा जाता है। उनका कहना है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार कर उन्होंने बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया है और बंदूक की जगह कलम थमाने का प्रयास किया है, लेकिन वर्षों की सेवा के बावजूद उन्हें सेवा सुरक्षा नहीं मिल पाई है।
धर्मेंद्र दास वैष्णव, जो कोंडागांव जिले के केशकाल ब्लॉक के एक नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पदस्थ हैं, ने कहा कि जिन गांवों तक कभी सड़कें नहीं थीं, वहां अतिथि शिक्षकों ने शिक्षा की अलख जगाई और कई विद्यार्थियों को इंजीनियर, वकील तथा अन्य पेशों तक पहुंचाया। इसके बावजूद सरकार अब तक संविलियन या समायोजन पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले सकी है। उन्होंने कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की आवश्यकता है। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने आत्मानंद और विवेकानंद विद्यालयों का उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व में आत्मानंद स्कूलों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को बेहतर वेतन और सुविधाएं दी गई थीं, जबकि वर्तमान सरकार विवेकानंद विद्यालयों में भी इसी प्रकार की व्यवस्था कर रही है। उनका आरोप है कि वर्षों से सेवा दे रहे विद्यामितान शिक्षकों के हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि समान कार्य के लिए समान वेतन, सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक भविष्य की है।
इससे पहले भी अतिथि शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर शिक्षा मंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग की थी। उनका कहना था कि यदि सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकती तो उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार भी नहीं मिल रहा है। इधर, दुर्ग प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अतिथि शिक्षकों की मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विद्यामितान शिक्षकों के मामले में जो भी उचित होगा, सरकार उस पर निर्णय लेगी। फिलहाल, शिक्षकों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।