गुंडरदेही । गुरु पूर्णिमा के अवसर पर छत्तीसगढ़ के विभिन्न आश्रमों में भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। योग आयोग के अध्यक्ष रूप नारायण सिन्हा मुख्य अतिथि के रूप में विमल वैदिक सेवा आश्रम पैरी, कबीर घाट मोहलाई और मानव कल्याण आश्रम बघमरा में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने गुरु परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा,समर्थ गुरु रामदास ने छत्रपति शिवाजी जैसे महान योद्धा का निर्माण किया। रामकृष्ण परमहंस ने बालक नरेंद्र को स्वामी विवेकानंद में रूपांतरित किया। सच्चे गुरु अपने जीवन को मानव कल्याण और देशहित के लिए समर्पित करते हैं। रूप नारायण सिन्हा ने कहा कि योग हमें राष्ट्रधर्म से जोड़ता है और आत्मविकास के साथ सामाजिक जागरूकता की ओर भी प्रेरित करता है। उन्होंने आश्रमों द्वारा समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाने के कार्यों की सराहना की।
कविता, वृक्षारोपण और प्रेरणा–
कार्यक्रम में प्रख्यात कवि केशव राम साहू ने गुरु की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि वृक्ष भी गुरु के समान है, जो बिना किसी भेदभाव के छाया, फल और प्राणवायु देता है। उन्होंने कविता पाठ के माध्यम से पौधरोपण की प्रेरणा दी और इसे पर्यावरण की सेवा के साथ गुरु-भक्ति का प्रतीक बताया।
स्थानीय नेतृत्व ने की विकास की बात
नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और आश्रमों के विकास को लेकर शासन-प्रशासन तक मांग पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक केंद्र न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत हैं, बल्कि सामाजिक समरसता के भी प्रतीक हैं
गरिमामयी उपस्थिति और श्रद्धालुओं का उत्साह
गुरु पूर्णिमा कार्यक्रमों में अनेक गणमान्य अतिथि एवं श्रद्धालु शामिल हुए। उपस्थित प्रमुख लोगों में पूर्व विधायक राजेंद्र राय,पूर्व जनपद अध्यक्ष भानुमति साहू,विमल वैदिक सेवा आश्रम पैरी के अध्यक्ष सालिक राम वर्मा,कबीर घाट मोहलई के अध्यक्ष युवराम साहू,मानव कल्याण आश्रम के संस्थापक गुरु प्रसाद मानववादी,रीना साहू, सावत राम साहू, केसु राम, महादेव रजक, विष्णु साहू, बेनीराम और हीराराम साहू शामिल रहे। तीनों आश्रमों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही, जिन्होंने गुरु पूजा, भजन, प्रवचन और सेवा कार्यों में भाग लेकर अपनी आस्था प्रकट की।
गुरु पूर्णिमा पर संदेश–
कार्यक्रमों में यह संदेश प्रमुखता से उभरा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाले पथप्रदर्शक होते हैं। और योग, ध्यान, सेवा और सत्संग के माध्यम से समाज को सशक्त बनाने में आश्रमों और गुरुओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।