स्कूलों में मंत्रोच्चार पर रोक की मांग खारिज, हाईकोर्ट से अब्दुल सलमान रिज़वी को झटका ! अदालत ने फिलहाल शासन के आदेश में हस्तक्षेप से किया इनकार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार संबंधी राज्य शासन के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका गुरुवार को खारिज कर दी। इस फैसले के साथ ही छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल सलमान रिज़वी को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने फिलहाल शासन के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि आदेश पूरी तरह लागू होने में अभी समय है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में इस आदेश के क्रियान्वयन के बाद किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है या कोई ठोस संवैधानिक आधार सामने आता है, तो याचिकाकर्ता नई याचिका दाखिल कर सकते हैं।

संविधान के प्रावधानों का दिया गया था हवाला

अब्दुल सलमान रिज़वी ने अपनी याचिका में दावा किया था कि स्कूलों में मंत्रोच्चार संबंधी शासन का आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता), अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) तथा अनुच्छेद 28 (शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा से जुड़े प्रावधान) का उल्लंघन करता है। उन्होंने आदेश को निरस्त करने की मांग की थी।

याचिकाकर्ता की ओर से रखा गया पक्ष

सुनवाई के दौरान तहफ़्फ़ुज़-ए-नमूस-ए-रिसालत एक्शन ट्रस्ट (TNRTA) के उपाध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आमिर खान ने याचिकाकर्ता की ओर से दलील रखते हुए कहा कि सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में किसी धार्मिक गतिविधि को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता और यह संविधान की मूल भावना के विपरीत है।

फिलहाल प्रभावी रहेगा शासन का आदेश

हाईकोर्ट ने कहा कि वर्तमान चरण में आदेश के क्रियान्वयन से पहले हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में आदेश लागू होने के बाद किसी प्रकार का संवैधानिक या कानूनी विवाद उत्पन्न होता है, तो याचिकाकर्ता दोबारा न्यायालय का रुख कर सकते हैं। इस फैसले के बाद फिलहाल राज्य सरकार का स्कूलों में मंत्रोच्चार संबंधी आदेश प्रभावी रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *