कोविड में अनाथ हुए बच्चों से कलेक्टर अभिजीत सिंह की आत्मीय मुलाकात, सपनों को मिले नए पंख ! 10 बच्चों से की व्यक्तिगत चर्चा, शिक्षा, छात्रवृत्ति, 10 लाख की सहायता और जरूरी दस्तावेजों के शीघ्र अपडेट के दिए निर्देश

कोविड में अनाथ हुए बच्चों से कलेक्टर अभिजीत सिंह की आत्मीय मुलाकात, सपनों को मिले नए पंख ! 10 बच्चों से की व्यक्तिगत चर्चा, शिक्षा, छात्रवृत्ति, 10 लाख की सहायता और जरूरी दस्तावेजों के शीघ्र अपडेट के दिए निर्देश

दुर्ग। कोविड-19 महामारी में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के जीवन में नई उम्मीद जगाने की पहल सोमवार को दुर्ग कलेक्ट्रेट में देखने को मिली। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कोविड के कारण अनाथ हुए 10 बच्चों से आत्मीय मुलाकात कर उनके हालचाल, पढ़ाई, सपनों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियां सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित संवाद कार्यक्रम में प्रीति टंडन, करीना टंडन, स्पनिल बोस, दुष्यंत कुमार साहू, जयंत कुमार साहू, वैभव बंजारे, सुल्ताना खान, यमुना ठाकुर, जय ठाकुर और रविंद्र कुमार टंडन से कलेक्टर ने व्यक्तिगत बातचीत की। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई, स्कूल और भविष्य के सपनों के बारे में जानकारी लेते हुए उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

शासन की योजनाओं का मिलेगा पूरा लाभ

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी बच्चे को शासन की योजनाओं का लाभ लेने में कोई परेशानी न हो। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री केयर्स योजना एवं राज्य शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत बच्चों को 23 वर्ष की आयु पूरी होने पर 10 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता, कक्षा 1 से 12वीं तक प्रतिवर्ष 20 हजार रुपये की छात्रवृत्ति, स्पॉन्सरशिप योजना, महतारी दुलार योजना सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

जरूरी दस्तावेज जल्द होंगे तैयार

बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग को सभी बच्चों के आधार कार्ड का बायोमेट्रिक अपडेट, 18 वर्ष से अधिक आयु वाले बच्चों के वोटर आईडी कार्ड तथा जाति प्रमाण पत्र शीघ्र तैयार कराने के निर्देश भी दिए गए, ताकि भविष्य में उन्हें किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने में कठिनाई न हो।

प्रशासन ने दिया अपनापन का भरोसा

कार्यक्रम का सबसे भावुक पक्ष यह रहा कि बच्चों को केवल योजनाओं के हितग्राही नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह सुना गया। बच्चों ने अपने सपनों और भविष्य की इच्छाओं को साझा किया, वहीं कलेक्टर ने भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए हर कदम पर उनके साथ खड़ा रहेगा। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास अधिकारी अजय साहू, जिला बाल संरक्षण अधिकारी प्रीति डांगरे, परियोजना समन्वयक चंद्रप्रकाश पटेल सहित जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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