अंबेडकर अस्पताल के ACI में हाई-रिस्क हार्ट सर्जरी सफल: पीठ से घुसकर दिल में धंसी एयरगन गोली निकाली, 40 वर्षीय मरीज को नया जीवन

अंबेडकर अस्पताल के ACI में हाई-रिस्क हार्ट सर्जरी सफल: पीठ से घुसकर दिल में धंसी एयरगन गोली निकाली, 40 वर्षीय मरीज को नया जीवन

रायपुर | राजधानी के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) की हार्ट सर्जरी टीम ने बुधवार को एक बेहद जटिल, दुर्लभ और जानलेवा जोखिम वाले ऑपरेशन में ऐतिहासिक सफलता हासिल की। टीम ने महाराष्ट्र सीमा से लगे क्षेत्र के 40 वर्षीय मरीज जीवन पटेल के दिल (राइट वेंट्रिकल) में धंसी 8×4 एमएम आकार की एयरगन की गोली (छर्रा/छर्रे जैसा प्रोजेक्टाइल) निकालकर उनकी जान बचाई। गोली पीठ से शरीर में घुसकर पसलियों और फेफड़ों को चीरते हुए सीधे हार्ट के राइट वेंट्रिकल तक पहुंच चुकी थी। हार्ट के चारों ओर तेज़ी से खून जमा होने से मरीज कार्डियक टैम्पोनेड (Cardiac tamponade) की गंभीर स्थिति में जा चुका था, जिससे हर सेकंड जान का खतरा बढ़ता जा रहा था। इस हाई-स्टेक सर्जरी का नेतृत्व हार्ट सर्जन डॉ. केके साहू ने किया।

कैसे शुरू हुआ घटनाक्रम
19 नवंबर की दोपहर लगभग 4 बजे, जीवन पटेल साप्ताहिक बाजार जाने निकले थे। खड़गांव (बस स्टैंड, खड़गांव) के पास आरोपी लालदास दुग्गा से किसी बात को लेकर विवाद हुआ और आरोपी ने चिड़िया मारने वाली एयरगन से पीठ पर गोली चला दी।गोली लगते ही वे गिर पड़े, जिसके बाद उन्हें तुरंत खड़गांव अस्पताल ले जाया गया, फिर हालत बिगड़ने पर मोहला अस्पताल शिफ्ट किया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए 21 नवंबर को अंबेडकर अस्पताल ACI रेफर किया गया, जहां मरीज को अत्यंत नाजुक अवस्था में लाया गया था।

ऑपरेशन की चुनौतियां और 4 घंटे की जंग
सर्जरी की कमान संभालने वाले डॉ. केके साहू ने बताया—”जब मरीज ट्रॉमा यूनिट में आया, उसका ब्लड प्रेशर 70/40 तक गिर चुका था। सीटी-स्कैन ने स्थिति साफ कर दी थी—बुलेट पीठ से हार्ट में जा धंसी है। बिना ओपन-हार्ट सर्जरी के बचना संभव नहीं था।”परिजनों से ‘डेथ-ऑन-टेबल हाई-रिस्क कन्सेंट’ लेकर मरीज को तुरंत कार्डियक OT में शिफ्ट किया गया।हार्ट-लंग मशीन पर मरीज को रखा गया,दिल की धड़कन अस्थायी रूप से रोकी गई,राइट एट्रियम को काटकर, ट्राइकस्पिड वॉल्व के रास्ते राइट वेंट्रिकल तक पहुंचा गया
राइट वेंट्रिकल में फंसी गोली मूवेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन से रियल-टाइम लोकेशन ट्रैक कर निकाली गई।
डॉक्टरों के अनुसार, ट्रांससोफेजियल इकोकार्डियोग्राफी से गोली का सटीक स्थान नहीं मिल पा रहा था, जिसके बाद मोबाइल डिजिटल एक्स-रे मशीन इस ऑपरेशन में ‘गेम-चेंजर’ साबित हुई। गोली निकालने के साथ-साथ पसलियों, फेफड़े, पल्मोनरी धमनी और हार्ट मसल में हुए नुकसान को भी सूक्ष्मता से रिपेयर किया गया।पूरे ऑपरेशन में लगभग 4 घंटे का समय लगा, जिसमें 7 यूनिट ब्लड का उपयोग हुआ। सर्जरी पूरी होने के बाद मरीज की स्थिति ICU में स्थिर पाई गई।

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