बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 2019 शिक्षक भर्ती के हजारों शिक्षकों को बड़ा राहत भरा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि सरकार 2020 का स्टाइपेंड आधारित नया नियम 2019 के विज्ञापन पर लागू नहीं कर सकती। डबल बेंच द्वारा 19 नवंबर 2025 को सुनाया गया यह 61 पेज का ऐतिहासिक जजमेंट पूरे राज्य के सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याताओं पर गहरा प्रभाव डालने वाला है।
क्या था मामला?
शिक्षा विभाग ने 09 मार्च 2019 को सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता के हजारों पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। कई पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारी—जैसे पंचायत शिक्षक, ADEO, AVFO, सुपरवाइज़र आदि—ने NOC लेकर आवेदन किया और चयन के बाद तकनीकी इस्तीफा देकर नई पदस्थापना जॉइन की।लेकिन सरकार ने जॉइनिंग के दौरान 28–29 जुलाई 2020 का नया सर्कुलर लागू कर दिया, जिसके अनुसार पहले तीन वर्ष 70–80–90% स्टाइपेंड दिया जाता था, फुल सैलरी नहीं। शिक्षकों ने इस नियम को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
हाई कोर्ट का बड़ा फैसला — शिक्षक पक्ष की पूर्ण विजय
- 2020 का स्टाइपेंड नियम 2019 भर्ती पर लागू नहीं
कोर्ट ने कहा कि भर्ती के नियम वही होंगे, जो विज्ञापन के समय लागू थे। 2020 के संशोधन को लागू करना अवैध है।
- सभी शिक्षकों को जॉइनिंग की तारीख से ही 100% बेसिक सैलरी
70–80–90% स्टाइपेंड वाली नीति को खारिज कर दिया गया।
अब सभी शिक्षकों को नियुक्ति दिवस से फुल पे दिया जाएगा।
- टेक्निकल रिज़िग्नेशन वाले शिक्षकों को मिलेगा पे-प्रोटेक्शन
FR 22-B(1) के तहत पुरानी नौकरी की सैलरी की सुरक्षा की जाएगी। इससे कई शिक्षकों की सैलरी पहले से अधिक हो जाएगी।
गेम चेंजर: सरकार की पूरी हार, शिक्षकों की ऐतिहासिक जीत
इस फैसले के बाद 2019 भर्ती के सभी शिक्षकों को तीन बड़े लाभ मिलेंगे:
जॉइनिंग से फुल सैलरी
पुरानी नौकरी का पे-प्रोटेक्शन
वर्षों की बकाया राशि (एरियर)
हाई कोर्ट का यह फैसला शिक्षा विभाग के लिए बड़ा संदेश है और हजारों शिक्षकों के लिए लंबे संघर्ष के बाद न्याय की ऐतिहासिक जीत साबित हुई है।