माँ अभियान: महानदी के उद्गम से जनजागरण और जलसंरक्षण की ऐतिहासिक शुरुआत

रायपुर । छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी महानदी अब केवल एक नदी नहीं, बल्कि जनभागीदारी, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बनती जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की प्रेरणा से शुरू हुए “माँ अभियान” ने जलसंरक्षण और जनजागरण की दिशा में नया अध्याय लिख दिया है।

अभियान की पहली कड़ी में धमतरी जिले के नगरी-सिहावा क्षेत्र में शुक्रवार को ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला, जब लगभग दो हजार लोगों ने सामूहिक श्रमदान कर महानदी की सफाई का संकल्प लिया। फरसियां गांव से गणेश घाट तक 14 किलोमीटर लंबी नदी की सफाई कर स्थानीय लोगों ने यह संदेश दिया कि जलसंरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है।

अभियान की शुरुआत मां महामाई मंदिर में पूजा-अर्चना और महानदी आरती के साथ हुई। इस दौरान वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से “माँ अभियान” के उद्देश्य और महत्व की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तावित “मोर गांव, मोर पानी” अभियान जलसंकट से निपटने की दूरदर्शी पहल मानी जा रही है। महानदी के उद्गम क्षेत्र को पर्यटन और जलसंरक्षण के केंद्र के रूप में विकसित करना इसका मुख्य लक्ष्य है।

इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा, विधायक अंबिका मरकाम, जनपद उपाध्यक्ष हृदय साहू सहित कई जनप्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जिला कलेक्टर अभिनाश मिश्रा और पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार ने जनभागीदारी की सराहना करते हुए इसे दीर्घकालीन परियोजना के रूप में आगे बढ़ाने की बात कही।

अभियान को धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ते हुए कविता पाठ, आरती, जलकलश यात्रा और शपथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। महिलाओं द्वारा गणेश घाट से कर्णेश्वर महादेव मंदिर तक निकाली गई जलयात्रा ने अभियान को आध्यात्मिक भाव से भी समृद्ध किया।

जिला प्रशासन ने महानदी उद्गम स्थल के सर्वांगीण विकास की योजना बनाई है, जिसमें एनीकट निर्माण, घाट सौंदर्यीकरण, वृक्षारोपण, पेयजल सुविधा, चित्रकारी, सड़कों का विकास और साइनबोर्ड शामिल हैं। धार्मिक स्थलों पर कर्मकांडों के लिए समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

“नदियां हमारी मां हैं और इन्हें बचाने की जिम्मेदारी हमारी है,” पुलिस अधीक्षक परिहार के इन शब्दों ने अभियान की आत्मा को उजागर किया। माँ अभियान सिर्फ नदी बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को जल, जीवन और विरासत सौंपने की प्रतिबद्धता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सोच, प्रशासन की तत्परता और जनसहयोग की भावना से यह पहल एक आंदोलन बन रही है, जो छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश के लिए मिसाल बन सकती है।

6 thoughts on “माँ अभियान: महानदी के उद्गम से जनजागरण और जलसंरक्षण की ऐतिहासिक शुरुआत

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