रायपुर। इस वर्ष होली पर्व पर चंद्र ग्रहण का विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहण और भद्रा के कारण होलिका दहन और रंगोत्सव की तिथियों में बदलाव रहेगा। 2 मार्च की रात 1:26 बजे से 2:38 बजे के बीच होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा, जबकि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण के प्रभाव के कारण रंग-गुलाल नहीं खेला जाएगा। रंगों की होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। आचार्य पं. विनोद चौबे के अनुसार 2 मार्च की शाम 5:55 बजे से 3 मार्च की शाम 5:07 बजे तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। भद्रा नक्षत्र 2 मार्च की शाम 5 बजे से शुरू होकर 3 मार्च की सुबह 5:32 बजे तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार यदि भद्रा अर्द्धरात्रि पार कर ऊषाकाल तक पहुंच जाए तो भद्रा मुख को छोड़कर भद्रा पुच्छ के समय होलिका दहन करना श्रेष्ठ माना जाता है। इस गणना के अनुसार 2 मार्च को रात 1:26 बजे से 2:38 बजे तक होलिका दहन करना शुभ रहेगा। जो लोग इस समय दहन नहीं कर पाएंगे, वे चंद्र ग्रहण का सूतक लगने से पहले होलिका जला सकते हैं।
3 मार्च को रहेगा ग्रहण का प्रभाव
मां महामाया मंदिर के पुजारी पं. मनोज शुक्ला ने बताया कि 3 मार्च को सुबह 6:19 बजे से चंद्र ग्रहण का सूतक प्रारंभ हो जाएगा। दोपहर 3:19 बजे ग्रहण स्पर्श होगा और शाम 6:47 बजे ग्रहण मोक्ष होगा। भारत में यह ग्रहण शाम 6:07 से 6:47 बजे तक लगभग 40 मिनट दिखाई देगा, लेकिन इसका प्रभाव दिनभर रहेगा। इसी कारण 3 मार्च को रंग खेलना उचित नहीं माना गया है।
सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा ग्रहण
शंकराचार्य आश्रम के संचालक ब्रह्मचारी डॉ. इंदु भवानंद ने बताया कि यह चंद्र ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में रहेगा तथा भारत में दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक सुबह से ही प्रभावी रहेगा। भले ही दिनभर पूर्णिमा तिथि हो, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रंगोत्सव चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। इस कारण 4 मार्च को रंग-गुलाल खेलना अधिक उपयुक्त रहेगा। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि श्रद्धालु शास्त्रीय विधि से होलिका दहन करें और ग्रहण काल के नियमों का पालन करते हुए पर्व मनाएं।