रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री का मुद्दा गरमाया रहा। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर और धरमलाल कौशिक ने प्रदेश में बढ़ते नशे और तस्करी को लेकर प्रशासन को असफल बताया, जबकि गृहमंत्री विजय शर्मा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
‘छत्तीसगढ़ के युवा नशे की चपेट में’
अजय चंद्राकर ने AIIMS और सामाजिक न्याय मंत्रालय के राष्ट्रीय सर्वेक्षण के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में ड्रग यूजर की संख्या डेढ़ से दो लाख के बीच पहुंच गई है, जबकि गांजा सेवन करने वालों की संख्या 3.8 से 4 लाख तक है। उन्होंने दावा किया कि 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के 40 हजार से अधिक बच्चे और किशोर इन्हेलेंट्स व कफ सिरप के आदी हैं। चंद्राकर ने कहा कि नशे की लत के कारण मानसिक तनाव बढ़ रहा है और 250 से 300 तक मौतें आत्महत्या से जुड़ी बताई जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी रायपुर सहित कई शहरों में नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध हैं और प्रशासन इसे रोकने में विफल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में पुलिस आरक्षक तक नशीले पदार्थों की बिक्री में पकड़े गए हैं। टिकरापारा थाना क्षेत्र में आरक्षक के खिलाफ हेरोइन बेचने का मामला दर्ज होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तस्करों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हो रही।
‘मैक्सिको जैसी स्थिति नहीं होगी’
गृहमंत्री विजय शर्मा ने जवाब में कहा कि प्रदेश में नशे के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में 31 जनवरी तक 146 प्रकरणों में 257 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। वर्ष 2025 में 1288 मामलों में 2342 आरोपियों की गिरफ्तारी कर बड़ी मात्रा में गांजा, हेरोइन, अफीम, ब्राउन शुगर, एमडीएमए सहित अन्य मादक पदार्थ जब्त किए गए। उन्होंने बताया कि 2025 में 16 आरोपियों की करीब 13.29 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त या फ्रीज की गई है तथा 2024 से 31 जनवरी 2026 तक 145 आदतन आरोपियों पर PIT-NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। शर्मा ने कहा, “मैक्सिको की स्थिति का उदाहरण देना उचित नहीं है। हमारे देश और प्रदेश में ऐसी स्थिति न पहले थी और न होगी। प्रशासन फेल होने का दावा गलत है।” सरकार ने सभी जिलों में टास्क फोर्स गठित की है और 10 जिलों में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के लिए 100 नए पद स्वीकृत किए गए हैं।
शराब पर बहस की मांग
सदन में नशे के मुद्दे पर चर्चा के दौरान शराब नीति पर भी बहस की मांग उठी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जब चर्चा चल रही है तो शराब पर भी विस्तृत बहस होनी चाहिए। इस पर विजय शर्मा ने कहा, “शराब पर चर्चा लंबी है, फिर कर लेंगे।” बघेल ने तीखे स्वर में कहा, “सत्र चल रहा है, चर्चा कराइए।”
गिग वर्करों का मुद्दा भी उठा
प्रश्नकाल में अजय चंद्राकर ने स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्करों की सुरक्षा और श्रम अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि फिलहाल गिग वर्करों को संगठित या असंगठित श्रमिक की श्रेणी में नहीं रखा गया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत केंद्र सरकार के अधिनियम के अनुरूप नियम लागू होंगे।
अन्य मुद्दे भी गूंजे
सत्र के दौरान जांजगीर में सीएसआर फंड की पारदर्शिता, बिलासपुर में हरित क्षेत्र और ऑक्सीजन बढ़ाने की मांग जैसे मुद्दे भी उठे। आने वाले दिनों में रोजगार, बुनियादी ढांचा, पेयजल और शहरी पर्यावरण जैसे विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और अन्य मंत्री विभिन्न वार्षिक प्रतिवेदन एवं अधिसूचनाएं सदन में पेश करेंगे।