“उद्योग नहीं लगाया तो जमीन गई : 1 रु/वर्गफुट में मिली जमीन पर नहीं रखा एक ईंट, सरकार ने 20 उद्योगपतियों का आवंटन किया निरस्त”

रायपुर-छत्तीसगढ़ सरकार ने उरला, सिलतरा, तिल्दा-नेवरा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में सस्ते दरों पर जमीन लेकर उद्योग न लगाने वाले उद्योगपतियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने 1 रुपए प्रति वर्गफुट की रियायती दर पर जमीन हासिल करने वाले 20 उद्योगपतियों का आवंटन निरस्त कर दिया है। इन उद्योगपतियों को 500 से 1200 रुपए प्रति वर्गफुट की बाजार दर वाली जगह पर मात्र 1 रुपए में दो-दो एकड़ जमीन दी गई थी। जमीन इस शर्त पर दी गई थी कि तीन साल के भीतर उद्योग स्थापित किया जाए, लेकिन जांच में पाया गया कि इन उद्योगपतियों ने न तो निर्माण कार्य शुरू किया और न ही कोई प्रोजेक्ट आगे बढ़ाया। शासन ने अब कार्रवाई करते हुए सभी का आवंटन रद्द कर दिया है।

250 से अधिक को नोटिस, बाकी की भी जमीनें जाएंगी

राज्यभर में 250 से अधिक ऐसे उद्योगपतियों की सूची तैयार की गई है जिन्हें इसी तरह रियायती दर पर जमीन दी गई थी। इन सभी को नोटिस जारी कर जमीन खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि एक से तीन महीने में जमीन नहीं लौटाई गई, तो उनका आवंटन भी रद्द कर दिया जाएगा।

राजनीतिक संबंध भी आए सामने

जांच में यह भी सामने आया है कि रियायती दरों पर जमीन पाने वाले अधिकांश उद्योगपति पिछली कांग्रेस सरकार के करीबी थे। इन उद्योगपतियों को सिलतरा, मेटल पार्क, उरला और तिल्दा-नेवरा जैसे आउटर औद्योगिक इलाकों में एक से दो एकड़ तक की जमीन अलॉट की गई थी।

मौके पर वीडियोग्राफी और फील्ड रिपोर्ट

सीएसआईडीसी (छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम) के अधिकारियों ने आवंटित जमीनों का निरीक्षण किया और हर एक उद्योगपति की फील्ड रिपोर्ट तैयार की। मौके पर फोटो और वीडियोग्राफी भी की गई, जिससे यह साफ हुआ कि अधिकतर जगहों पर न तो बाउंड्री बनी थी और न ही कोई निर्माण कार्य शुरू हुआ था।

नोटिसों को किया नजरअंदाज, सरकार हुई सख्त

इन उद्योगपतियों को कई बार नोटिस जारी कर प्रोजेक्ट शुरू करने को कहा गया, लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए आवंटन रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

सीएसआईडीसी के कार्यपालक संचालक आलोक त्रिवेदी ने कहा:
“जमीन लेने के बाद भी जिन्होंने उद्योग नहीं लगाया, उन्हें कई बार चेतावनी दी गई। लेकिन जब इसके बाद भी कोई पहल नहीं हुई, तो हमारे पास आवंटन निरस्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *