
रायपुर/बिलासपुर। अचानकमार के वनांचल में आदिवासी बच्चों की जिंदगी बदलने वाले ‘दिल्ली वाले साहब’ के नाम से पहचाने जाने वाले प्रो. पीडी खेड़ा ने जीवन के अंतिम समय में भी अपनी संपत्ति अपने लिए नहीं, बल्कि गरीब आदिवासी बच्चों के भविष्य के लिए छोड़ने की इच्छा जताई थी। उनकी इच्छा थी कि बैंक खातों में जमा उनकी रकम का उपयोग 12वीं के बाद आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए किया जाए। लेकिन उनकी मृत्यु के करीब आठ साल बाद भी उनकी बताई गई इच्छा पूरी नहीं हो सकी है। करीब 42 लाख रुपए की जमा राशि अब भी बैंक में अटकी हुई बताई जा रही है। दूसरी ओर, जिस दस्तावेज के आधार पर इस राशि को स्कूल समिति के माध्यम से बच्चों की शिक्षा पर खर्च किया जाना था, उसकी मूल प्रति उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है।
अस्पताल में तैयार हुआ था शपथ पत्र
वर्ष 2018-19 में गंभीर बीमारी के दौरान प्रो. खेड़ा अपोलो अस्पताल में भर्ती थे। इसी दौरान उन्होंने अपनी जमा-पूंजी और संपत्ति गरीब आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए देने की इच्छा जताई थी। बताया गया है कि अस्पताल में तत्कालीन कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में इस संबंध में शपथ पत्र तैयार किया गया था। प्रो. खेड़ा चाहते थे कि उनके बैंक खातों में जमा रकम अभ्यारण शिक्षण समिति, छपरवा के माध्यम से बच्चों की शिक्षा में उपयोग हो। इससे 12वीं के बाद आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को ITI, NEET, IIT सहित अन्य उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण में आर्थिक मदद देने की योजना थी।
करीब 42 लाख रुपए अब भी बैंक में
बताया जा रहा है कि प्रो. खेड़ा के बैंक खातों में करीब 42 लाख रुपए जमा हैं। करीब 10 वर्षों से खातों में कोई लेन-देन नहीं हुआ है। खातों में नॉमिनी दर्ज नहीं होने के कारण बैंक स्तर पर इन खातों को अनक्लेम्ड डिपॉजिट की श्रेणी में भेजे जाने की प्रक्रिया की बात सामने आ रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस रकम को आदिवासी बच्चों के भविष्य के लिए इस्तेमाल किया जाना था, वह आज भी बैंक खाते में क्यों अटकी हुई है?
तत्कालीन मुंगेली कलेक्टर को दी गई थी जिम्मेदारी
प्रो. खेड़ा के करीबी रहे संदीप चोपड़े के मुताबिक अभ्यारण शिक्षण समिति छपरवा में स्थानीय ग्रामीण शामिल हैं। अस्पताल में तैयार किए गए दस्तावेज में यह तय किया गया था कि समिति के प्रस्ताव के आधार पर मुंगेली कलेक्टर के निर्देशन में राशि का उपयोग किया जाएगा।उन्होंने बताया कि अचानकमार वन क्षेत्र में नया निर्माण कराने में कई तरह की दिक्कतें हैं। इसी वजह से स्कूल के विकास से जुड़े काम प्रभावित होते रहे हैं। उनका कहना है कि बैंक में जमा रकम के उपयोग के लिए मुंगेली कलेक्टर की पहल जरूरी होगी और इस संबंध में उनस