
प्रशासनिक काम के साथ कक्षा में भी संभालनी होगी जिम्मेदारी, प्राचार्य एसोसिएशन ने व्यवस्था को बताया अव्यावहारिक
रायपुर, 12 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के शासकीय हाई स्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों के प्राचार्यों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत अब प्राचार्य केवल प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि आवश्यकता के अनुसार उन्हें कक्षाओं में जाकर प्रतिदिन कम से कम दो कालखंड अध्यापन भी कराना होगा। विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य प्राचार्यों की शैक्षणिक गतिविधियों में सीधी भागीदारी बढ़ाना और विद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता की बेहतर निगरानी सुनिश्चित करना है।
प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ अध्यापन भी
नई व्यवस्था के अनुसार प्राचार्यों को विद्यालय के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों का निर्वहन करने के साथ जरूरत के अनुसार कक्षाओं में अध्यापन करना होगा। विभाग का मानना है कि इससे प्राचार्य विद्यार्थियों की पढ़ाई और विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था से सीधे जुड़े रहेंगे।
निर्धारित कक्षों का उसी काम में होगा उपयोग
गाइडलाइन में स्कूल भवन के कमरों के उपयोग को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं। प्राचार्य, लिपिक और अन्य कर्मचारियों के लिए भवन के डिजाइन में जो कक्ष निर्धारित हैं, उनका उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया जाएगा। अध्यापन के लिए निर्धारित कक्षों में प्राचार्य, लिपिक अथवा अन्य कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था नहीं की जाएगी। इन कमरों का उपयोग विद्यार्थियों के अध्ययन-अध्यापन के लिए ही किया जाएगा।
बड़े कमरों को भी नहीं बनाया जा सकेगा कार्यालय
विद्यालयों में उपलब्ध बड़े कक्षों का उपयोग भी छात्र-छात्राओं के अध्ययन-अध्यापन के लिए करने के निर्देश दिए गए हैं। इन कमरों को कार्यालयीन कार्य अथवा कर्मचारियों के बैठने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
नई व्यवस्था पर प्राचार्य एसोसिएशन का विरोध
नई गाइडलाइन जारी होने के बाद छत्तीसगढ़ प्राचार्य एसोसिएशन ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि प्राचार्यों पर पहले से ही प्रशासनिक, वित्तीय और विभागीय कार्यों का काफी दबाव है। ऐसे में मौजूदा व्यवस्थाओं और कार्यभार की समीक्षा किए बिना प्रतिदिन दो कालखंड अध्यापन की अतिरिक्त जिम्मेदारी देना व्यावहारिक नहीं है। अब नई व्यवस्था के क्रियान्वयन और प्राचार्य संगठन के विरोध के बीच स्कूल शिक्षा विभाग के इस फैसले को लेकर आगे क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर नजर रहेगी।