रायपुर। छत्तीसगढ़ के आयरन-स्टील कारोबारियों और उनसे जुड़े नेटवर्क पर आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई रविवार को चौथे दिन भी जारी रही। विभाग ने 4 दिसंबर को तड़के लगभग 45 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा था। शुरुआती जांच में 300 करोड़ रुपए से अधिक की टैक्स चोरी के संकेत मिले हैं। इस बड़े ऑपरेशन में 200 से ज्यादा अधिकारी शामिल हैं। अधिकारियों ने संभावना जताई है कि 7 दिसंबर की शाम तक छापे की कार्रवाई पूरी हो जाएगी। जांचकर्ताओं ने कई कारोबारियों और उनके सहयोगियों के बयान दर्ज किए हैं। अब तक मिली जानकारी में फर्जी बिलिंग, सर्कुलर रूटिंग, इंटर-कंपनी एंट्रीज और खर्चों को बढ़ाकर दिखाने जैसी तकनीकों से बड़े पैमाने पर टैक्स की हेरफेर का अंदेशा सामने आया है। इस नेटवर्क से 20 से अधिक कंपनियों के जुड़े होने की जानकारी मिल रही है। जांच टीम को आशंका है कि टैक्स चोरी से अर्जित ब्लैक मनी को रियल एस्टेट और प्रापर्टी में निवेश किया गया है। साइबर एक्सपर्ट की टीम ने डिलीट किए गए डिजिटल डेटा को सफलतापूर्वक रिकवर किया है। हालांकि रेड के दौरान कैश या सोना बरामद नहीं हुआ, लेकिन विभाग के हाथ भारी मात्रा में महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्स लगे हैं, जिनमें इंटरनल हिसाब-किताब, मैसेज रिकॉर्ड और नोटिंग्स जैसी फाइलें शामिल हैं। इनसे छुपे पैसों के लेन-देन के कई सबूत मिले हैं।
• किन कारोबारियों के ठिकानों पर छापा
हिंदुस्तान कॉइल के अरविंद अग्रवाल, महामाया स्टील के राजेश अग्रवाल, ओम स्पंज के रवि बजाज, राधामणि स्टील के अंकुश अग्रवाल, बिजनेसमैन महेश गोयल सहित उनके रिश्तेदारों और बिजनेस पार्टनर्स से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
• जबरदस्त डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त
अफसरों ने रेड के दौरान कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, फाइनेंशियल लेजर, रजिस्टर, लैंड डील से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल डेटा जब्त किया है। अधिकांश डिवाइसेस की हाई-इंटेंसिटी क्लोनिंग और वेरिफिकेशन की जा रही है।
सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन रिकॉर्ड, एमएस पाइप यूनिट की फाइलें, खरीद से जुड़े डॉक्यूमेंट और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रेल की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार शुरुआती पैटर्न से संकेत मिलते हैं कि बड़ी मात्रा में ब्लैक मनी को प्लॉट, कमर्शियल प्रॉपर्टी और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में लगाया गया हो सकता है।
• मुंबई–कोलकाता से पहुंची 15 सदस्यीय साइबर टीम
IT विभाग की साइबर एक्सपर्ट टीम कम्प्यूटर, हार्ड डिस्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का फॉरेंसिक विश्लेषण कर रही है। डिलीट डेटा को रिकवर कर लेनदेन से जुड़ी बैकअप फाइलों को सुरक्षित स्टोर किया जा रहा है।
• नया इन्वेस्टिगेशन मॉडल: हाई सीक्रेसी ऑपरेशन
यह छापेमारी PDIT इन्वेस्टिगेशन विंग के प्रमुख IRS अधिकारी के रवि किरण की अगुवाई में हो रही है, जिन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है। नई टीम ने हाई-सीक्रेसी मॉडल, मल्टी-सिटी समन्वय और तेज कार्रवाई रणनीति अपनाई है। विभाग का दावा है कि यह ऑपरेशन औद्योगिक कॉरिडोर में लंबे समय से छिपे एक बड़े वित्तीय घोटाले को उजागर कर सकता है।
• कैश कम, सबूत ज्यादा
हालांकि बड़ी मात्रा में नकदी या सोना बरामद नहीं हुआ है, लेकिन दस्तावेज ऐसे मिले हैं जो फर्जी लेन-देन, इंटरनल रिकन्सिलिएशन और छिपे फंड चैनल्स का संकेत दे रहे हैं। विभाग को उम्मीद है कि इन कागजों और डिजिटल सबूतों से पूरे वित्तीय नेटवर्क की परतें खुलेंगी।