रायपुर: छत्तीसगढ़ में इस वर्ष कक्षा 5वीं और 8वीं की वार्षिक परीक्षाएं बोर्ड पैटर्न पर आयोजित की जा रही हैं, लेकिन रिजल्ट जारी करने की नई व्यवस्था ने विवाद खड़ा कर दिया है। पहली बार छात्रों को दो अलग-अलग अंकसूचियां (मार्कशीट) देने का फैसला लिया गया है, जिसे लेकर शिक्षकों ने आपत्ति जताई है। शिक्षा विभाग के अनुसार, एक अंकसूची स्कूल स्तर से ‘प्रगति पत्रक’ के रूप में जारी की जाएगी, जिसे शिक्षकों को हाथ से भरना होगा। वहीं दूसरी अंकसूची जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय से कंप्यूटराइज्ड रूप में जारी की जाएगी, जिसे आधिकारिक माना जाएगा। डीईओ एफआर वर्मा ने बताया कि राज्य स्तर से कक्षा 1 से 8वीं तक के प्रगति पत्रक स्कूलों को भेज दिए गए हैं। कक्षा 5वीं और 8वीं की परीक्षाएं केंद्रीकृत तरीके से आयोजित हो रही हैं, इसलिए इन दोनों कक्षाओं की कंप्यूटराइज्ड अंकसूची डीईओ कार्यालय से जारी की जाएगी। अंतिम परिणाम तैयार करने में अर्धवार्षिक परीक्षा को 30 प्रतिशत और वार्षिक परीक्षा को 70 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा।
इस नई व्यवस्था का छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने विरोध किया है। एसोसिएशन के कवर्धा जिला अध्यक्ष डॉ. रमेश चंद्रवंशी ने इसे “अव्यावहारिक” बताते हुए कहा कि इससे न केवल अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा, बल्कि शिक्षकों पर भी अनावश्यक दबाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि छह फोल्ड वाले विस्तृत प्रगति पत्रक को हाथ से भरना शिक्षकों के लिए बड़ी परेशानी है। जब डीईओ कार्यालय से कंप्यूटराइज्ड मार्कशीट दी ही जा रही है, तो दूसरी मैन्युअल अंकसूची का कोई औचित्य नहीं है। इससे छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति भी बन सकती है। शिक्षकों का कहना है कि पिछले वर्ष केवल एक ही अंकसूची डीईओ कार्यालय से जारी की गई थी, जिससे किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई थी। वहीं कक्षा 1 से 4 और 6 से 7 तक के छात्रों के लिए केवल प्रगति पत्रक दिया गया था।
इस वर्ष कक्षा 5वीं की परीक्षाएं 16 से 25 मार्च तक आयोजित की गईं, जबकि कक्षा 8वीं की परीक्षाएं 17 मार्च से 6 अप्रैल तक चलेंगी। परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन दूसरे ब्लॉक में किया जा रहा है, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। नई व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच अब यह देखना होगा कि शिक्षा विभाग इसमें कोई बदलाव करता है या मौजूदा प्रणाली को ही लागू रखता है।