दुर्ग। प्रदेश के अग्रणी माने जाने वाले दुर्ग जिला अस्पताल में नसबंदी ऑपरेशन के दौरान दो महिलाओं की संदिग्ध मौत ने स्वास्थ्य तंत्र को हिला दिया है। शनिवार को हुई इस घटना के बाद परिजनों ने मेडिकल टीम पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं, वहीं अस्पताल प्रशासन ने इसे दवाओं के संभावित रिएक्शन का मामला बताया है। फिलहाल सिविल सर्जन ने जांच के आदेश जारी किए हैं, और दवाओं के नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए हैं।
◆ कैसे हुई घटना?
पहली मृतका पूजा यादव (27 वर्ष), निवासी बजरंग नगर, दुर्ग शनिवार को नसबंदी ऑपरेशन के लिए अस्पताल आई थीं। ऑपरेशन के दौरान ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी — शरीर में झटके आने लगे और मांसपेशियाँ अकड़ गईं। डॉक्टरों ने तुरंत आईसीयू में भर्ती किया, लेकिन कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई। दूसरी मृतका किरण यादव (30 वर्ष), निवासी सिकोला भाटा ने उसी दिन सुबह सिजेरियन डिलीवरी के बाद नसबंदी करवाई थी। ऑपरेशन के दौरान ही उन्हें भी अचानक झटके आने लगे। तमाम प्रयासों के बावजूद शाम तक उन्होंने दम तोड़ दिया। परिवार अब नवजात शिशु को लेकर सदमे में है।
◆संभावित कारण — दवाओं का रिएक्शन
सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह आशंका है कि दोनों महिलाओं को दी गई एनेस्थीसिया या किसी दवा के रिएक्शन से यह घटना हुई हो सकती है।
◆ दवाओं की सूची:
पूजा यादव: Bupivacaine (3 ml), Midan (1 mg), 2 RL (Ringer Lactate) किरण यादव: Bupivacaine (2.2 ml), Oxytocin (10 IU), 2 RL और 1 DNS इन सभी दवाओं के नमूने परीक्षण हेतु भेजे गए हैं।
◆ एक ही दिन 9 सर्जरी — दो मौतें, बाकी महिलाएं सुरक्षित
शनिवार को अस्पताल में कुल 9 सर्जरी की गईं — इनमें से 7 सफल रहीं, जबकि 2 महिलाओं की मृत्यु हो गई। ऑपरेशन टीम में डॉ. उज्जवला देवांगन, डॉ. विनीता ध्रुवे, डॉ. रिंपल (स्त्री रोग विशेषज्ञ), और डॉ. पूजा वर्मा (एनेस्थेटिस्ट) शामिल थीं।
◆ परिजनों का आक्रोश और जांच के आदेश
परिजनों का कहना है कि दोनों महिलाएं ऑपरेशन से पहले पूर्णतः स्वस्थ थीं और यह मौतें गलत दवा या लापरवाही का नतीजा हैं। आक्रोश बढ़ने पर प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। सिविल सर्जन ने विशेषज्ञों की टीम गठित कर जांच शुरू कर दी है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह मेडिकल नेग्लिजेंस थी या दवाओं की रासायनिक प्रतिक्रिया।
◆घटना ने उठाए गंभीर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। राज्य में उच्च रैंक प्राप्त दुर्ग जिला अस्पताल की इस चूक ने स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर चोट पहुंचाई है।