रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद एक बार फिर सतह पर आ गए हैं। सोमवार को रायपुर में हुई पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ बयानबाजी करने वालों के खिलाफ आज तक पार्टी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। भले ही उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इशारे की दिशा स्पष्ट थी—नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और पीसीसी चीफ दीपक बैज।
बैठक में कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट भी मौजूद थे, जो दो दिवसीय दौरे पर रायपुर पहुंचे हैं। पहले दिन उन्होंने दिनभर संगठन से जुड़े नेताओं से बातचीत की।
भूपेश का तीखा सवाल:
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा, “मुख्यमंत्री पर हमला करने से हमारे ही सीनियर नेता बचते रहते हैं। अगर हम सरकार और उसके मंत्रियों पर सीधा हमला नहीं करेंगे, तो जनता के बीच कैसे मजबूत विकल्प बनेंगे?” उन्होंने यह भी कहा कि जब वे खुद 2013 में प्रदेश अध्यक्ष बने थे, तब उन्होंने डॉ. रमन सिंह को निशाने पर लेकर कांग्रेस को दोबारा सत्ता में लाने की जमीन तैयार की थी।
टीएस सिंहदेव ने दिया समर्थन:
पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने बैठक में भूपेश का समर्थन करते हुए कहा, “जब भूपेश पीसीसी अध्यक्ष थे और मैं नेता प्रतिपक्ष, तब दोनों ने मिलकर टारगेटेड रणनीति से भाजपा सरकार को घेरा। भाजपा जैसे लगातार राहुल गांधी को टारगेट करती है, हमें भी उसी शैली में काम करना होगा।”
वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी:
बैठक में कुछ वरिष्ठ नेताओं ने यह मुद्दा उठाया कि उन्हें पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जा रही है, जिससे उनके अनुभव का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। यह भी कहा गया कि समन्वय की कमी के कारण संगठनात्मक ऊर्जा कमजोर हो रही है।
भूपेश के हमले का असर:
बैठक के बाद यह तय किया गया कि कांग्रेस अब सीधे मुख्यमंत्री और मंत्रियों को उनके फैसलों पर घेरने की रणनीति अपनाएगी। विधानसभा सत्र में भी ऐसे प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनसे सीधे मंत्री जवाबदेह बनें। इस रणनीति को भूपेश की खुली नाराजगी के बाद नई धार देने की कोशिश माना जा रहा है।
7 जुलाई को होगा शक्ति प्रदर्शन:
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल आगामी 7 जुलाई को रायपुर में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे। इसमें भाजपा सरकार की विफलताओं को उजागर करने और कांग्रेस की आक्रामक रणनीति की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।