“भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब अटूट है, किसी को खतरा नहीं” — रायपुर में बोले पद्मश्री ग़ज़ल गायक उस्ताद अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन

रायपुर। पद्मश्री से सम्मानित जयपुर के मशहूर ग़ज़ल गायक उस्ताद अहमद हुसैन और उस्ताद मोहम्मद हुसैन इन दिनों रायपुर दौरे पर हैं। शहर में आयोजित कार्यक्रम के सिलसिले में पहुंचे दोनों फनकारों ने पत्रकारों से बातचीत में संगीत, ग़ज़ल के भविष्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और देश के सामाजिक माहौल जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। धर्म विशेष के लोगों के खतरे में होने के सवाल पर उन्होंने साफ कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता। उनका मानना है कि उनकी खुशनसीबी है कि वे भारत में रहते हैं। अगर सच में कोई खतरा होता तो यह पहले भी महसूस होता, सिर्फ आज ही क्यों महसूस होता। उन्होंने कहा कि भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब सदियों से लोगों को जोड़ती आई है और लोग मिलजुलकर रहते आए हैं। आगे भी यही परंपरा कायम रहेगी।

संगीत कभी खत्म नहीं होगा

मौजूदा दौर में संगीत के माहौल पर बात करते हुए दोनों कलाकारों ने कहा कि मौसिकी का वातावरण कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन इसे जीवित रखने के लिए संस्थाओं और लोगों को आगे आना होगा। उनका कहना है कि जब तक इंसान जिंदा है, तब तक संगीत और शायरी भी जिंदा रहेगी। अगर ग़ज़ल और शायरी खत्म हो जाती तो वे आज भी लोगों के बीच मौजूद नहीं होते।

रैप और रीमिक्स पर भी दी राय

आज के दौर में ग़ज़ल की जगह रैप और रीमिक्स के बढ़ते चलन पर उन्होंने कहा कि किसी भी कला को सही तरीके से सीखना जरूरी है। गुरु के सान्निध्य में सीखने से ही असली ज्ञान मिलता है। चाहे रैप हो या कोई नया प्रयोग, उसमें गुणवत्ता होना जरूरी है, तभी वह लंबे समय तक कायम रहता है, वरना थोड़े समय बाद उसका असर खत्म हो जाता है।

AI संगीत का सहारा, विकल्प नहीं

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए बन रहे संगीत पर दोनों उस्तादों ने कहा कि AI एक अच्छी तकनीक है और इसे पूरी तरह गलत नहीं कहा जा सकता। हालांकि उसमें भावनाएं और विविधता की कमी होती है। यह किसी कलाकार के लिए सहायक हो सकता है, लेकिन असली कला वही है जो रियाज़, समझ और संगीत की व्याकरण से आती है।

भाईचारे की मिसाल

लंबे समय से साथ गाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी आपसी मोहब्बत, समझदारी, परिवार के संस्कार और माता-पिता की दी हुई सीख उन्हें एक साथ बांधे हुए हैं। उनके पिता ने सिखाया था कि अगर एक की तारीफ हो तो वह दोनों की तारीफ मानी जाएगी।

नफरत फैलाने वालों को संदेश

देश में बढ़ती धार्मिक राजनीति पर टिप्पणी करते हुए दोनों कलाकारों ने कहा कि इंसान के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मंजिल एक ही है। अंत में हर इंसान को मिट्टी में ही मिलना है, इसलिए बेहतर है कि लोग नफरत की जगह मोहब्बत का संदेश फैलाएं। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि समाज में ऐसी खबरें और बातें सामने लाई जाएं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए सकारात्मक माहौल बनाएं।

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