
रायपुर। राजधानी रायपुर के नकटी गांव में प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध को लेकर बजरंग दल में अंदरूनी विवाद खुलकर सामने आ गया है। संगठन द्वारा विरोध प्रदर्शन से जुड़े पदाधिकारियों को पदमुक्त किए जाने के बाद कई कार्यकर्ताओं ने भी संगठन छोड़ दिया है। वहीं, पदमुक्त पदाधिकारियों ने अलग संगठन बनाने की घोषणा कर दी है। इस घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर बजरंग दल के कथित चैट्स भी वायरल हो रहे हैं, जिनमें कुछ कार्यकर्ता भाजपा नेताओं के खिलाफ नाराजगी जताते और विरोध के संदेश साझा करते दिखाई दे रहे हैं।
पूर्व रायपुर संयोजक विजेंद्र वर्मा ने बताया कि नकटी गांव में प्रशासन की कार्रवाई के दौरान करीब 80 परिवारों के घर तोड़े गए। उनका आरोप है कि विस्थापित परिवारों को जिन स्थानों पर बसाया गया, वहां पानी, बिजली और भोजन जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था। साथ ही, लोगों के रोजगार के साधन भी प्रभावित हुए क्योंकि उन्हें पहले के कार्यस्थलों से 20 से 30 किलोमीटर दूर भेज दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन फ्लैटों में परिवारों को बसाया गया, वे बड़े परिवारों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। वर्मा के अनुसार, प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में मौजूद गोवंश को गौशालाओं में पहुंचाने की व्यवस्था की गई, जबकि कई गायों की मौत होने का भी दावा किया गया। उनका कहना है कि क्षेत्र में स्थित शीतला माता और भगवान शंकर के मंदिरों को भी हटाया गया, लेकिन उनके उचित पुनर्स्थापन की व्यवस्था नहीं की गई। इन्हीं मुद्दों को लेकर प्रभावित परिवारों के समर्थन में कलेक्ट्रेट का घेराव कर प्रदर्शन किया गया था।
पूर्व संयोजक ने कहा कि उन्होंने विस्थापन और प्रभावित परिवारों की समस्याओं को लेकर सरकार से सवाल उठाए थे। उनका आरोप है कि इन सवालों से सरकार की छवि प्रभावित हुई, जिसके बाद संगठन के खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि बजरंग दल का मूल उद्देश्य हिंदू समाज, मंदिरों और गोवंश से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाना है और इसी भावना के तहत विरोध प्रदर्शन किया गया था। विजेंद्र वर्मा ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन से पहले संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से अनुमति ली गई थी और जिला स्तर के पदाधिकारियों ने इसकी पूरी योजना बनाई थी। उनके अनुसार, बाद में संगठन के कुछ पदाधिकारी दबाव में आ गए, जिसके चलते कार्रवाई की गई। उधर, संगठन द्वारा पदमुक्त किए गए पदाधिकारियों के समर्थन में दर्जनों कार्यकर्ताओं ने भी इस्तीफा दे दिया है। इन सभी ने मिलकर नए संगठन के गठन का ऐलान किया है। इस पूरे घटनाक्रम पर बजरंग दल के प्रांत मंत्री पुरेंद्र सिन्हा का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। संगठन की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।