विधानसभा में गूंजा मछुआ नीति का मुद्दा: स्थानीय मछुआरों के अधिकारों पर सवाल, सरकार ने नई नीति का दिया भरोसा

विधानसभा में गूंजा मछुआ नीति का मुद्दा: स्थानीय मछुआरों के अधिकारों पर सवाल, सरकार ने नई नीति का दिया भरोसा

गैर-मछुआ समितियों को तालाब पट्टा देने के आरोप, मंत्री रामविचार नेताम बोले- जांच के बाद होगी कार्रवाई, नई नीति में दूर होंगी सभी विसंगतियां
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को मछली पालन पट्टा और मछुआ नीति को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। स्थानीय मछुआ सहकारी समितियों की अनदेखी कर गैर-मछुआ समितियों को तालाबों का पट्टा दिए जाने का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से उठा। इस पर वन एवं मत्स्य मंत्री रामविचार नेताम ने जांच के बाद कार्रवाई करने और नई मछुआ नीति में सभी विसंगतियों को दूर करने का आश्वासन दिया। विधायक कुंवर सिंह निषाद ने बाम्हनीडीह और बलौदा क्षेत्र का मामला उठाते हुए आरोप लगाया कि स्थानीय मछुआ समाज के अधिकारों की अनदेखी कर ऐसे लोगों को तालाबों का पट्टा दिया गया है, जो मछुआ समुदाय से जुड़े नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय सहकारी समितियों के हित प्रभावित हो रहे हैं।

जवाब में मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि संबंधित मामलों की स्थानीय कलेक्टर से जांच कराई गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएंगे।बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने भी मौजूदा मछुआ नीति की खामियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों के तालाबों में आदिवासियों से किसी प्रकार का कर नहीं लिया जाना चाहिए, लेकिन वर्तमान नीति में ऐसे प्रावधान हैं जिन्हें संशोधित करने की जरूरत है।

इस बीच भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने वर्ष 2022 में बनी तत्कालीन सरकार की मछुआ नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि बड़े जलाशयों के ठेके पंजीकृत व्यक्ति या संस्थाओं को देने के प्रावधान से स्थानीय मछुआ समुदाय के अधिकार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने नई नीति में इन प्रावधानों की समीक्षा कर स्थानीय मछुआरों को प्राथमिकता देने की मांग की। मंत्री रामविचार नेताम ने सदन में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार नई मछली पालन नीति तैयार कर रही है। इसमें वर्तमान नीति की सभी विसंगतियों को दूर करते हुए स्थानीय मछुआरों, सहकारी समितियों और आदिवासी समुदाय के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि नई नीति अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत होगी।

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