बस्तर। शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक (जेडी) राकेश पांडेय एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार मामला ड्रेस कोड को लेकर गर्माया हुआ है। शिक्षक संगठनों ने आरोप लगाया है कि जेडी साहब स्वयं तो कभी टी-शर्ट तो कभी चप्पल पहनकर दफ्तर आते हैं, लेकिन शिक्षकों को जींस पैंट पहनने पर आपत्ति जताते हैं। जानकारी के अनुसार, माध्यमिक शाला मचली के शिक्षक प्रकाश नेताम को विभाग ने स्पष्टीकरण देने के लिए कार्यालय बुलाया था। वे सफेद शर्ट और काले जींस पैंट में पहुंचे थे। जैसे ही संयुक्त संचालक की नजर उन पर पड़ी, उन्होंने आपत्ति जताई और कहा — “मेरे ऑफिस में जींस पैंट नहीं चलता।” इतना कहकर उन्होंने शिक्षक को चैंबर से बाहर जाने के लिए कह दिया।
घटना के बाद शिक्षक संगठनों में रोष फैल गया। संगठनों ने कहा कि यदि जेडी साहब खुद विभागीय मर्यादा का पालन नहीं करते, तो दूसरों से अनुशासन की उम्मीद कैसे की जा सकती है। सोशल मीडिया पर उनकी कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे टी-शर्ट, चप्पल और कैमरे के साथ स्कूलों की रिपोर्टिंग करते नजर आ रहे हैं। शिक्षक संगठनों ने संयुक्त संचालक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष मनीष मिश्रा और नवीन शिक्षक संघ के अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत सहित कई संगठनों ने संयुक्त रूप से चेतावनी दी है कि यदि राकेश पांडेय ने सार्वजनिक रूप से शिक्षक से माफी नहीं मांगी, तो प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किया जाएगा।
संगठनों का कहना है कि शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को अपनी भाषा और व्यवहार की मर्यादा रखनी चाहिए। इस तरह का रवैया शिक्षकों के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाता है। शिक्षक संगठनों ने यह भी निर्णय लिया है कि मामले की शिकायत शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री से की जाएगी। वहीं, शिक्षकों ने कहा है कि “जेडी साहब खुद टी-शर्ट-चप्पल पहनकर आएं तो ठीक, लेकिन जब कोई शिक्षक शालीन कपड़ों में दफ्तर आए तो उसे फटकारना विभागीय अनुशासन नहीं, बल्कि दंभी व्यवहार है। प्रदेशभर के शिक्षकों में इस घटना को लेकर नाराजगी है,
मेरे हिसाब से इसमें जेडी साहब बिल्कुल सही है, बच्चे शिक्षक को अपना आदर्श मानते हैं शिक्षक दिवस मनाते हैं, जेडी साहब ने तो उन्हें आईना दिखाने की कोशिश की है, सभी स्कूलों में शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड रखना ही चाहिए, धोती कुर्ता पहनकर आए जैसे हमारे समय आज से 15 से 20 साल पहले के शिक्षक आते थे