दक्षिण पाटन के औसर–डिगहारी सहित कई गांवों में गिरदावरी से अनेक किसानों के खसरा नंबर गायब — पटवारी हल्का से नदारद,किसानों में आक्रोश

दक्षिण पाटन के औसर–डिगहारी सहित कई गांवों में गिरदावरी से अनेक किसानों के खसरा नंबर गायब — पटवारी हल्का से नदारद,किसानों में आक्रोश

जामगांव आर। धान खरीदी की तैयारी के बीच किसानों की परेशानियाँ लगातार बढ़ रही हैं। दक्षिण पाटन क्षेत्र के औसर और डिगहारी सहित कई गांवों में गिरदावरी रिपोर्ट से अनेक किसानों के खसरा नंबर गायब पाए गए हैं। इससे किसानों के धान खरीदी पंजीयन में गंभीर अड़चनें आ गई हैं। गौरतलब है कि राज्य शासन ने इस वर्ष 15 नवम्बर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की घोषणा की है। लेकिन खरीदी प्रक्रिया का आधार बनने वाली गिरदावरी रिपोर्ट में हुई गड़बड़ियों ने अनेक किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

किसानों का आरोप है कि जिम्मेदारों की लापरवाही और रिकॉर्ड की त्रुटियों ने उनकी मेहनत को संकट में डाल दिया है। उल्लेखनीय है कि पटवारी, ग्राम पंचायत और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी की उपस्थिति में गिरदावरी रिपोर्ट तैयार की जाती है, ग्राम औसर के किसान शिवाजी वर्मा ने बताया कि हमारे गाँव औसर में अनेक कृषकों का आधा रकबा ही गिरदावरी में दर्ज है। शेष रकबा गायब है, अब किसान धान कहां बेचें? सोसायटी में पूछो तो कहते हैं हमें नहीं पता, और पटवारी तो हल्का से नदारद रहते है ऐसे में किसान किसके पास जाकर पूछताछ करें । उन्होंने बताया कि हल्का नंबर 43 के पटवारी लंबे समय से क्षेत्र में मौजूद नहीं रहते, जिससे किसानों को अपनी शिकायत दर्ज कराने तक का अवसर नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में जानकारी लेने ब्लॉक के राजस्व अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन नही उठाया ।

किसानों की नाराजगी — ‘जनप्रतिनिधि और प्रशासन दोनों मौन’

किसानों का कहना है कि इस मामले में  न क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे हैं, न प्रशासन सक्रिय है। ग्राम औसर के झलेन्द्र सोनवानी, संजय यादव और मनोज वर्मा ने बताया कि कई खेतों में वास्तविक रूप से धान की फसल लगी है, लेकिन रिकॉर्ड से गायब है इस त्रुटि से किसानों का खरीदी रकबा घट गया है और समर्थन मूल्य पर धान बेचने का अधिकार सीमित हो गया है ।

किसानों की अपील — “गिरदावरी रिपोर्ट की जांच कराई जाए

किसानों ने शासन से मांग की है कि गिरदावरी रिकॉर्ड की तत्काल जांच करवाई जाए, पटवारियों की हल्का में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी व निष्पक्ष बनाया जाए। कृषक शिवाजी वर्मा ने कहा  सरकार कहती है कि किसान हित में काम कर रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके उलट है। किसान अपने ही खेत की फसल का हक पाने के लिए भटक रहा है।

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