लद्दाख बंद: पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग पर सड़कों पर उतरे हजारों लोग, लेह-कारगिल में बाजार बंद

YC न्यूज़ डेस्क । लद्दाख में सोमवार को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण की मांग को लेकर व्यापक बंद और प्रदर्शन देखने को मिला। लेह और कारगिल में बाजार बंद रहे तथा हजारों लोग सड़कों पर उतरकर रैलियों और मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने बैनर और पोस्टर लेकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। यह बंद एपेक्स बॉडी लेह (ABL) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के आह्वान पर किया गया था। दोनों संगठन केंद्र सरकार के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकलने के कारण आंदोलन तेज किया गया है। प्रदर्शन उस समय हुए जब हाल ही में पर्यावरण कार्यकर्ता Sonam Wangchuk को करीब छह महीने बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत से रिहा किया गया है।

सिंगे नामग्याल चौक से पोलो ग्राउंड तक रैली

लेह में रैली का नेतृत्व लेह एपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष Tsering Dorje ने किया। प्रदर्शनकारी सिंगे नामग्याल चौक से पोलो ग्राउंड तक मार्च करते हुए पहुंचे। रैली में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। कुछ प्रदर्शनकारी पिछले साल सितंबर में पुलिस फायरिंग में मारे गए चार लोगों की तस्वीरें लेकर रैली में शामिल हुए। उस समय आंदोलन के दौरान हालात हिंसक हो गए थे और पुलिस कार्रवाई में चार लोगों की मौत हो गई थी।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

लद्दाख के पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंग ने सिंगे नामग्याल चौक पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर में अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, पूरे प्रदर्शन के दौरान कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

प्रतिबंधों के बावजूद उमड़ी भीड़

रैली को संबोधित करते हुए त्सेरिंग दोरजे ने कहा कि प्रशासन ने कई सड़कों को बंद कर दिया था और कुछ प्रतिबंध भी लगाए गए थे, इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जनता को धन्यवाद देते हुए कहा कि इससे यह स्पष्ट हो गया है कि लद्दाख की जनता LAB और KDA के साथ खड़ी है।

सितंबर की हिंसा के बाद पहला बड़ा प्रदर्शन

पिछले साल सितंबर में हुए आंदोलन के दौरान हिंसा भड़कने और पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत के बाद यह पहला बड़ा विरोध प्रदर्शन है। उसी दौरान पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। हाल ही में केंद्र सरकार ने उन पर लगा NSA हटाकर उन्हें रिहा कर दिया। लद्दाख के संगठनों का कहना है कि जब तक क्षेत्र को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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