दुर्ग-भिलाई | विशेष रिपोर्ट दुर्ग जिले में 4 वर्षीय बच्चे की हत्या के मामले में सौतेले पिता और मां को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। घटना फरवरी 2024 में कुम्हारी के शंकर नगर की है, जहां दंपत्ति ने अपने बेटे की हत्या कर उसका गुपचुप अंतिम संस्कार कर दिया था। सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर की अदालत ने दोनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत उम्रकैद और 1,000 रुपए जुर्माना देने का आदेश दिया है।
•घटना का पूरा मामला
दंपत्ति मनप्रीत सिंह और गायत्री साहू काजू मुसलमान के मकान में किराए पर रहते थे। मृत बच्चा जगदीप सिंह, गायत्री का पूर्व पति से जन्मा पुत्र था और उसी दंपत्ति के साथ रह रहा था।आरोपी मनप्रीत बच्चे से लगातार अमानवीय व्यवहार करता था— उसे प्रताड़ित करता, मारता और कई बार अस्पताल पहुंचाने लायक चोटें भी पहुंचाता था।पड़ोसी हरिनाथ यादव ने पुलिस को बताया कि दो महीने पहले मनप्रीत ने बच्चे के गले में रस्सी बांधकर हवा में उठा दिया था। अपराध की रात 31 जनवरी 2024 को मोहल्लेवासियों ने दंपत्ति को बच्चे को बेरहमी से पीटते हुए देखा था। अगले ही दिन देर रात बच्चे की मौत हो गई, और दंपत्ति ने चुपचाप अंतिम संस्कार कर दिया।
•पोस्टमॉर्टम में क्रूरता का खुलासा
मृतक के शरीर पर कई गंभीर चोटें मिलीं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ—पेट और गुप्तांगों पर बर्बर प्रहार,जमीन पर पटकना
,निरंतर मारपीट इन्हीं वजहों से बच्चे की मौत हुई।
•पुलिस ने ऐसे खोला राज
कुम्हारी पुलिस ने अपराध क्रमांक 32/2024 दर्ज किया। निरीक्षक संजय मिश्रा और टीम ने पड़ोसियों के बयान, घटनास्थल निरीक्षण, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य जुटाए।
गुपचुप अंतिम संस्कार को लेकर शक बढ़ा, और दंपत्ति को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया। दोनों 2 फरवरी 2024 से जेल में हैं।
अदालत ने कहा— यह अपराध मानवता को हिला देने वाला
फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा—
“4 वर्षीय मासूम अपनी रक्षा करने में पूरी तरह असमर्थ था। अभियुक्तगण ने संरक्षण के कर्तव्य का घोर उल्लंघन किया। इस प्रकार के अपराध समाज की चेतना को झकझोर देते हैं। नरमी बरतना न्याय के विरुद्ध होगा।” अदालत ने कहा कि कठोर दंड ही समाज में यह संदेश देता है कि बच्चों पर अत्याचार करने वाले को कानून किसी भी कीमत पर नहीं बख्शेगा।
•….आगे क्या?
कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा काटने के लिए केंद्रीय कारागार दुर्ग भेजने का आदेश दिया है। समाज को झकझोर देने वाली इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं कि बच्चों के प्रति हिंसा और क्रूरता के खिलाफ समाज और प्रशासन को और कितनी सख्ती की जरूरत है।