दुर्ग। रायपुर जिले के चंदखुरी स्थित माँ कौशल्या धाम में 26, 27 और 28 सितंबर 2026 को मानस दर्शन जीवन अर्पण परिवार के तत्वावधान में ‘मानस ब्रह्म गर्भ’ विषय पर तीन दिवसीय विशाल धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। आयोजन में राष्ट्रीय संतों के चिंतन और उत्कृष्ट मानस मंडलियों की प्रस्तुतियों ने पूरे धाम को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर मानस और लोककला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को विभिन्न अलंकरणों से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध गायक और लोक संस्था धरोहर, राजनांदगांव के संचालक महादेव हिरवानी को ‘कला रत्न’ सम्मान प्रदान किया गया। वहीं, मानस दर्शन जीवन अर्पण के प्रति समर्पण और मानस संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान के लिए विष्णु साहू को ‘श्री राम दूत’ सम्मान से अलंकृत किया गया।
मानस के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प
मानस दर्शन जीवन अर्पण एक ऐसा धार्मिक मंच है, जिसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ के मानस प्रतिष्ठानों, मानस व्याख्याकारों और संगीत साधकों को एक मंच पर लाना तथा रामचरितमानस के आदर्शों और मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है। संस्था के संस्थापक दीपक गुहा इस उद्देश्य को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। अपनी विशिष्ट परिकल्पनाओं के माध्यम से वे मानस के गूढ़ रहस्यों और जीवनोपयोगी संदेशों को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। इसी कड़ी में इस वर्ष मां कौशल्या की पावन गोद में ‘मानस ब्रह्म गर्भ’ की परिकल्पना को साकार किया गया। तीन दिवसीय आयोजन में संतों के आध्यात्मिक चिंतन और मानस मंडलियों की सुमधुर प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को रामचरितमानस के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संदेशों से जोड़ने का कार्य किया।
मानस सेवा के लिए विष्णु साहू का सम्मान
विष्णु साहू ने विगत पांच वर्षों से मानस दर्शन के लिए अपना जीवन समर्पित कर रखा है। भद्रकाली माता के आशीर्वाद से बेमेतरा क्षेत्र में मानस दर्शन के प्रचार-प्रसार के साथ ग्राम पीपरभट्टा में ऐतिहासिक आयोजन कर उन्होंने संतों का सान्निध्य और आशीर्वाद प्राप्त किया है। मानस संस्कृति के प्रति उनकी इसी निष्ठा, सक्रियता और समर्पण को देखते हुए उन्हें ‘श्री राम दूत’ सम्मान प्रदान किया गया। वहीं, महादेव हिरवानी को ‘कला रत्न’ सम्मान से अलंकृत किया जाना छत्तीसगढ़ की लोकगायन परंपरा और सांस्कृतिक साधना के प्रति उनके योगदान का सम्मान है।यह आयोजन मानस परंपरा, भक्ति संगीत और आध्यात्मिक चिंतन को एक मंच पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा।