
दुर्ग। प्रदेश में सुशासन तिहार 2026 की शुरुआत के साथ सरकार जहां सुशासन और पारदर्शिता का संदेश दे रही है, वहीं जमीनी स्तर पर हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। खासकर महतारी वंदन योजना के तहत ई-केवाईसी प्रक्रिया में हो रही अवैध वसूली ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, सरकार ने महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों के लिए E-KYC प्रक्रिया को पूरी तरह नि:शुल्क रखा है। इसके लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) को प्रति E-KYC करीब 9.84 रुपये का भुगतान भी किया जा रहा है, ताकि महिलाओं को किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी न हो।लेकिन दुर्ग जिला सहित कई क्षेत्रों में स्थिति इसके विपरीत है। यहां चॉइस सेंटर संचालक खुलेआम महिलाओं से 50 से 70 रुपये तक वसूल रहे हैं। यह वसूली बिना किसी डर या रोक-टोक के जारी है, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि आखिर यह ‘सुविधा शुल्क’ किसके संरक्षण में लिया जा रहा है।
दूर-दराज से पहुंची महिलाएं, जो योजना का लाभ लेने आती हैं, मजबूरी में यह अतिरिक्त राशि देने को विवश हैं। मामले की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि कई जनप्रतिनिधियों और वार्ड पार्षदों द्वारा शिकायत किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुशासन तिहार जैसे अभियान के दौरान भी इस तरह की अनियमितताएं प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती हैं। एक ओर सरकार महिला सशक्तिकरण और पारदर्शी व्यवस्था की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर योजनाओं के नाम पर अवैध वसूली जारी है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकार पहले से ही E-KYC के लिए भुगतान कर रही है, तो फिर यह अतिरिक्त वसूली क्यों और किसके इशारे पर हो रही है?
अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषी संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, ताकि योजना का लाभ बिना किसी बाधा के वास्तविक हितग्राही महिलाओं तक पहुंच सके। अन्यथा ‘सुशासन’ का यह अभियान सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।