दोषी_कौन ? हादसों के बीच खोती इंसानियत और जिम्मेदारी से भागता सिस्टम

दोषी_कौन ? हादसों के बीच खोती इंसानियत और जिम्मेदारी से भागता सिस्टम

मनीष चंद्राकर। YC न्यूज़ डेस्क। जबलपुर के क्रूज हादसे में मां-बेटे की यह तस्वीर सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक सवाल है—ऐसा सवाल, जिसका जवाब हम सबको देना है। 9 शव मिल चुके हैं, 9 अब भी लापता हैं… लेकिन क्या सिर्फ आंकड़े ही खोए हैं? या हमने अपनी जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और जवाबदेही भी कहीं खो दी है? जब अच्छे कामों का श्रेय लेने की होड़ होती है, तो जिम्मेदारी लेने में इतनी चुप्पी क्यों छा जाती है? क्या दोष सिर्फ सरकार का है, जो हर बार अपनी गलती मानने से बचती है? या उस सिस्टम का, जो सालों से लापरवाही और भ्रष्टाचार के सहारे चल रहा है? या फिर हम सब भी कहीं न कहीं दोषी हैं—जो हर हादसे पर कुछ पल आक्रोश जताकर, अगले दिन सब भूल जाते हैं। राजनीति अपनी जगह खेलती रहती है—सत्ता पक्ष उपलब्धियां गिनाता है, विपक्ष आरोप लगाता है… लेकिन इन सबके बीच एक आम इंसान अपनी जान गंवा देता है। उसकी चीख, उसकी पीड़ा और उसके परिवार का दर्द, बहसों में कहीं खो जाता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है—

क्या हम सिर्फ दर्शक बनकर रह जाएंगे? या कभी ऐसा भी होगा जब जिम्मेदारी तय होगी, सिस्टम बदलेगा और इंसान की जान की कीमत समझी जाएगी? अगर हर हादसे के बाद हम सिर्फ “कौन दोषी?” पूछते रहेंगे और जवाब ढूंढने की कोशिश नहीं करेंगे, तो शायद यह सिलसिला कभी नहीं रुकेगा।
_@manish…✍️

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *