कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की अनूठी पहल : मुनगा पौधारोपण से घर-घर पहुंचेगा पोषण का संदेश

कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की अनूठी पहल : मुनगा पौधारोपण से घर-घर पहुंचेगा पोषण का संदेश

बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत बेमेतरा में विशेष पहल, गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों के घर लगाए गए मुनगा के पौधे

रायपुर, 09 जुलाई 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के स्वस्थ एवं कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने की दिशा में महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक अभिनव पहल की है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के आह्वान पर प्रदेशभर में कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में बेमेतरा जिले में बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ योजना के तहत “मुनगा पौधारोपण विथ सेल्फी अभियान” शुरू किया गया, जो पोषण, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का अनूठा उदाहरण बनकर उभरा है। बेमेतरा जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में महिला सशक्तिकरण केंद्र (हब), सेक्टर दाढ़ी-2 एवं सेक्टर कन्हेरा में अभियान संचालित किया गया। इस दौरान गंभीर कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा एनीमिया से प्रभावित महिलाओं के 18 घरों में मुनगा (सहजन) के पौधे लगाए गए। साथ ही परिवारों को पौधों की देखभाल और नियमित उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।

मुनगा को “सुपर फूड” माना जाता है। इसकी पत्तियों, फलियों और फूलों में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-ए, विटामिन-सी सहित अनेक आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसका नियमित सेवन गर्भवती महिलाओं में पोषण स्तर सुधारने, एनीमिया की रोकथाम तथा बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में बेहद लाभकारी है। अभियान के दौरान हितग्राहियों को मुनगा के पोषण और औषधीय गुणों की विस्तृत जानकारी भी दी गई। अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए “विथ सेल्फी अभियान” भी चलाया गया, ताकि लोग पौधारोपण के साथ उसके संरक्षण और नियमित उपयोग के प्रति भी जागरूक हों। विभाग का मानना है कि यदि प्रत्येक परिवार अपने घर में पोषण देने वाले पौधे लगाए और उनका उपयोग करे, तो कुपोषण और एनीमिया जैसी गंभीर समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जनभागीदारी और जागरूकता से जीती जा सकती है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर बच्चों, किशोरियों और माताओं को बेहतर पोषण उपलब्ध कराया जा सकता है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में ऐसे नवाचारों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। कार्यक्रम में सेक्टर सुपरवाइजर, मिशन शक्ति की जेंडर विशेषज्ञ, सखी वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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