YC न्यूज़ डेस्क । लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान देते हुए दावा किया कि भारत अब नक्सलवाद से लगभग मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा तय की गई 31 मार्च की समयसीमा के भीतर इस दिशा में निर्णायक सफलता हासिल की गई है और ‘रेड कॉरिडोर’ अब इतिहास बनने की ओर है।
सदन में अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद केवल विकास की कमी नहीं, बल्कि एक विचारधारा से जुड़ी चुनौती थी, जो हिंसा और अव्यवस्था को बढ़ावा देती थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए सुरक्षा और विकास—दोनों मोर्चों पर एक साथ काम किया।
गृहमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों, विशेषकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक शासन के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों में अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। उन्होंने सवाल उठाया कि इन इलाकों तक बुनियादी सुविधाएं और योजनाओं का लाभ आखिर क्यों नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, खासकर छत्तीसगढ़ के बस्तर में तेज़ी से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
अमित शाह ने यह भी दावा किया कि बस्तर, जो कभी नक्सलवाद का गढ़ माना जाता था, अब इस समस्या से काफी हद तक मुक्त हो चुका है। उन्होंने बताया कि एक समय ‘रेड कॉरिडोर’ के नाम से पहचाने जाने वाले क्षेत्र में 12 राज्य, देश का लगभग 70% भूभाग और करीब 30 करोड़ की आबादी प्रभावित थी, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।
अपने भाषण में गृहमंत्री ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF), कोबरा बटालियन, राज्य पुलिस—विशेषकर छत्तीसगढ़ पुलिस और डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के जवानों की भूमिका की सराहना की और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
अंत में उन्होंने सख्त संदेश देते हुए कहा कि देश में हिंसा के लिए अब कोई जगह नहीं है। “जो गोली चलाएंगे, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी,” उन्होंने कहा, साथ ही यह भी जोड़ा कि सरकार संवाद के लिए तैयार है, लेकिन हिंसा किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी।