रायपुर। लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच तीखा सियासी विवाद सामने आया। शाह ने जहां देश को लगभग नक्सल-मुक्त घोषित करते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर नक्सलियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया, वहीं बघेल ने इन आरोपों को “सरासर झूठ” बताते हुए सबूत सार्वजनिक करने की चुनौती दी। संसद में अपने संबोधन में अमित शाह ने दावा किया कि 31 मार्च 2026 तक केंद्र सरकार ने नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में नक्सली हिंसा में भारी कमी आई है और अब देश के केवल दो जिले ही नक्सल प्रभावित रह गए हैं। शाह के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में 706 नक्सली मारे गए हैं, जबकि 4,800 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर पुनर्वास योजनाओं का लाभ लिया है।
गृह मंत्री ने छत्तीसगढ़ की पूर्व कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “कांग्रेस सरकार ने नक्सलवादियों को बचाकर रखा।” उन्होंने सदन में तीखे लहजे में कहा, “भूपेश बघेल को पूछो, प्रूफ दूं क्या।” इस बयान पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा भी किया। शाह ने बस्तर क्षेत्र में हुए विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि अब वहां शिक्षा, स्वास्थ्य और राशन जैसी मूलभूत सुविधाएं गांव-गांव तक पहुंच चुकी हैं। उन्होंने नक्सलवाद को आदिवासी क्षेत्रों के पिछड़ेपन का मुख्य कारण बताते हुए कहा कि “लाल आतंक” के खत्म होने के बाद बस्तर अब विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने नक्सलियों की तुलना स्वतंत्रता सेनानियों से किए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। शाह ने कहा कि भगत सिंह और बिरसा मुंडा जैसे महानायकों की तुलना हथियार उठाकर हिंसा करने वालों से करना “हिमाकत” है।
वहीं, भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया के माध्यम से पलटवार करते हुए कहा कि गृह मंत्री का बयान पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में केंद्र और राज्य के बीच कई उच्चस्तरीय बैठकें हुईं, लेकिन कभी यह आरोप नहीं लगाया गया कि राज्य सरकार नक्सलियों को बचा रही है। बघेल ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार के पास कोई ठोस प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और उनकी सरकार ने भी लगातार सुरक्षा अभियानों और विकास कार्यों के जरिए इस समस्या से निपटने का प्रयास किया।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच नक्सलवाद का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है, जहां एक ओर केंद्र सरकार अपनी उपलब्धियां गिना रही है, वहीं विपक्ष इन दावों की सत्यता पर सवाल उठा रहा है।