वन्यजीवों के प्रजनन काल और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला, 2 अक्टूबर से फिर खुलेंगे पर्यटन स्थल
रायपुर, 16 जून 2026। छत्तीसगढ़ के प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव पर्यटन के शौकीनों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। मानसून के आगमन के साथ ही राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों को 15 जून से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया है। यह प्रतिबंध आगामी 1 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद 2 अक्टूबर से वन्यप्राणी सप्ताह के अवसर पर जंगल सफारी और पर्यटन गतिविधियां पुनः शुरू की जाएंगी। पीसीसीएफ एवं वन बल प्रमुख अरुण पांडेय ने बताया कि हर वर्ष मानसून के दौरान वन्यजीव संरक्षण और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया जाता है। बारिश के मौसम में जंगलों के कच्चे मार्ग, सफारी ट्रैक और नदी-नाले प्रभावित हो जाते हैं, जिससे आवागमन जोखिमपूर्ण हो जाता है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार मानसून का समय वन्यजीवों के लिए बेहद संवेदनशील होता है। इसी अवधि में अधिकांश वन्य प्रजातियों का प्रजनन और शावकों का पालन-पोषण होता है। ऐसे में पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगाकर वन्यजीवों को प्राकृतिक और शांत वातावरण उपलब्ध कराया जाता है।
इन प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों में रहेगा प्रवेश प्रतिबंधित
प्रदेश के जिन प्रमुख वन क्षेत्रों को पर्यटकों के लिए बंद किया गया है, उनमें अचानकमार टाइगर रिजर्व, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान सहित राज्य के सभी अधिसूचित अभयारण्य और संरक्षित वन क्षेत्र शामिल हैं।
बंदी के दौरान चलेगा संरक्षण अभियान
वन विभाग ने बताया कि इस अवधि में जंगलों में विशेष संरक्षण और निगरानी अभियान चलाया जाएगा। अवैध शिकार पर रोक लगाने के लिए गश्त बढ़ाई जाएगी, वन्यजीवों की निगरानी की जाएगी तथा प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन का कार्य किया जाएगा। साथ ही आगामी पर्यटन सत्र को ध्यान में रखते हुए सफारी मार्गों, ट्रैकों और पर्यटन सुविधाओं की मरम्मत एवं रखरखाव भी किया जाएगा।
वन्यजीव संरक्षण को मिली प्राथमिकता
वन विभाग का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है। हर साल हजारों पर्यटक छत्तीसगढ़ के जंगलों और टाइगर रिजर्व का भ्रमण करते हैं, लेकिन मानसून के दौरान लगाया गया यह प्रतिबंध पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और सतत पर्यटन विकास के लिए आवश्यक है।
भले ही पर्यटकों को अब तीन महीने से अधिक समय तक इंतजार करना पड़ेगा, लेकिन वन्यजीवों और पारिस्थितिकी संतुलन की दृष्टि से यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगामी 2 अक्टूबर से प्रदेश के जंगल एक बार फिर रोमांच और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ सैलानियों का स्वागत करेंगे।