
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मानवता, गरीबी और सिस्टम की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद मां की मौत हो गई, पिता ने नवजात को अपनाने से इनकार कर दिया और फिर तीन लाख रुपये के कथित इकरारनामे के साथ बच्चा दूसरे परिवार तक पहुंच गया। मामला सामने आते ही पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। जानकारी के मुताबिक करतला थाना क्षेत्र के ग्राम तुर्री कटरा निवासी सरजू प्रसाद राठिया अपनी पत्नी रमशीला राठिया को प्रसव पीड़ा होने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे थे। महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पत्नी की मौत के बाद पिता ने नवजात को रखने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उसके पहले से दो बच्चे हैं और वह इस बच्चे की जिम्मेदारी नहीं उठा पाएगा।
अस्पताल में कुछ समय तक यह असमंजस बना रहा कि आखिर नवजात को किसके संरक्षण में रखा जाए। इसी दौरान संजीवनी एक्सप्रेस चालक निर्मल कुमार राठौर सामने आया। बताया जा रहा है कि उसकी शादी को 13 साल हो चुके हैं और उसकी कोई संतान नहीं है। उसने बच्चे को अपनाने की इच्छा जताई। शुरुआत में लोगों ने इसे संवेदनशील पहल माना, लेकिन मामला तब विवादों में आ गया जब तीन लाख रुपये के कथित लेनदेन से जुड़ा इकरारनामा सामने आया।
दस्तावेज में कथित तौर पर दो लाख रुपये ऑनलाइन और एक लाख रुपये नगद देने का उल्लेख था। नोटरी के समक्ष तैयार हुए इस अनुबंध में दोनों पक्षों और गवाहों के हस्ताक्षर होने की बात कही जा रही है। दस्तावेज सामने आने के बाद नवजात की खरीदी-बिक्री और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोपों की चर्चा तेज हो गई।
सूत्रों के अनुसार पूरा घटनाक्रम अस्पताल परिसर के बाहर किया गया। बाद में मृतका के परिजन शव लेकर गांव रवाना हो गए, जबकि नवजात चालक के साथ चला गया। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद कथित इकरारनामा फाड़े जाने और परिजनों द्वारा बच्चे को वापस अपने साथ ले जाने की बात भी सामने आई है। इधर, संजीवनी चालक निर्मल कुमार राठौर ने खुद पर लगे आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि बच्चे की बेहतर परवरिश के उद्देश्य से उसे अपनाने की बात हुई थी और पैसों का कोई लेनदेन नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि जो अनुबंध बना था, उसे बाद में नष्ट कर दिया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और महिला एवं बाल विकास विभाग की शिकायत पर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। जिला प्रशासन ने इसे अवैध दत्तक ग्रहण और संभावित मानव तस्करी से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि देश में किसी भी बच्चे को कानूनी प्रक्रिया के बिना गोद देना या लेना पूरी तरह गैरकानूनी है। केवल केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण (CARA) की प्रक्रिया के तहत ही वैध दत्तक ग्रहण संभव है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि कथित लेनदेन और दस्तावेजी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।
यह मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक नवजात की जिंदगी को लेकर इतनी बड़ी लापरवाही और कथित सौदेबाजी कैसे हो गई।