छत्तीसगढ़ के हर शहर में बनेगा सर्वसुविधायुक्त मुक्तिधाम, तालाबों और उद्यानों का होगा सौंदर्यीकरण — सरकार ने जारी किए नए निर्देश

रायपुर | छत्तीसगढ़ के सभी नगरीय निकायों में अब लोगों को अधिक हरियाली, स्वच्छ सार्वजनिक स्थल और बेहतर मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को मुक्तिधाम, सरोवर, उद्यान और सार्वजनिक स्थलों में आवश्यक सुविधाएं विकसित करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
राज्य शहरी विकास अभिकरण (SULAB) और नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी निकायों को पत्र भेजकर कहा है कि कम से कम एक सर्वसुविधायुक्त मुक्तिधाम अनिवार्य रूप से बनाया जाए। इसके लिए सभी निकायों से 31 अक्टूबर तक प्रस्ताव मांगे गए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा — सम्मानजनक संस्कार है मौलिक अधिकार
29 सितंबर को हुई सुनवाई में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि “सम्मानजनक मृत्यु और संस्कार का अधिकार संविधान के तहत मौलिक अधिकार है।” अदालत ने कहा कि राज्य के कई मुक्तिधाम उपेक्षा का शिकार हैं, जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। इसके बाद सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए।
प्रस्ताव न भेजने पर होगी कार्रवाई
राज्य सरकार ने सभी नगरीय निकायों को 5 दिन की समयसीमा में प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं। समय पर प्रस्ताव न भेजने की स्थिति में निकाय प्रमुखों की जवाबदेही तय की जाएगी।
सरकार का लक्ष्य है कि हर शहर में —
एक सर्वसुविधायुक्त मुक्तिधाम,
हर वार्ड में गार्डन,
तालाबों का संरक्षण, और
महिलाओं के लिए सुरक्षित सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध हों।
◆ सरोवर-धरोहर योजना — हर तालाब होगा आकर्षक
‘सरोवर धरोहर योजना’ के तहत राज्य के सभी तालाबों का संरक्षण और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इसमें डी-वॉटरिंग, गहरीकरण, रिटेनिंग वॉल, वॉकिंग ट्रैक, योग स्थल, पौधरोपण और बच्चों के खेल उपकरण शामिल होंगे। इसके लिए प्रति हेक्टेयर 50 से 60 लाख रुपए का बजट तय किया गया है।
हाट बाजार के लिए अलग फंड
राज्य सरकार ने स्थानीय व्यापारियों की सुविधा के लिए हाट बाजारों के निर्माण पर भी जोर दिया है।
नगर निगमों को ₹1.50 करोड़,
गर पालिकाओं को ₹1 करोड़, और
नगर पंचायतों को ₹50 लाख
दिए जाएंगे।इन हाट बाजारों में ठेला, चबूतरा, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, शेड, डस्टबिन और पेयजल जैसी सुविधाएं होंगी।
महिलाओं के लिए “पिंक टॉयलेट” योजना
महिलाओं की सुविधा के लिए राज्य सरकार ने “पिंक टॉयलेट योजना” लागू करने का निर्णय लिया है। प्रत्येक टॉयलेट में स्नानघर, कपड़ा बदलने का कक्ष, चाइल्ड केयर रूम, सेनेटरी पैड मशीन, दिव्यांग-अनुकूल डिजाइन, हैंडवॉश और पर्याप्त वेंटिलेशन
की व्यवस्था होगी। प्रति इकाई के लिए ₹35 लाख तक की राशि तय की गई है।
उद्यानों में योग प्लेटफॉर्म और सोलर लाइट
उद्यान और पुष्पवाटिका योजना के तहत हर पार्क में
योगा प्लेटफॉर्म, ओपन जिम,पेयजल सुविधा, बच्चों के खेल उपकरण, चेनलिंक फेंसिंग और सोलर लाइट
लगाई जाएंगी। फव्वारों और जल-अपव्ययी संरचनाओं पर रोक लगाई जाएगी। प्रत्येक हेक्टेयर पर लगभग 60 लाख रुपए का प्रावधान होगा।
तीन चरणों में विकसित होंगे मुक्तिधाम
मुक्तिधामों के विकास कार्य तीन चरणों में पूरे किए जाएंगे — पहला चरण: शवदाह शेड, प्रतीक्षालय, चौकीदार कक्ष, पेयजल और शौचालय (₹25 लाख)।
दूसरा चरण: प्रवेश द्वार, पाथवे, बाउंड्री वॉल, सोलर लाइटिंग और लैंडस्केपिंग (₹25 लाख)। तीसरा चरण: नियमित रखरखाव स्थानीय निधियों से किया जाएगा।
राज्य सरकार का कहना है कि यह पहल शहरी जीवन गुणवत्ता सुधारने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे नागरिकों को सम्मानजनक सार्वजनिक स्थान, स्वच्छ वातावरण और हरित नगरीय परिवेश मिलेगा।

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