
रायपुर,। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की एक प्रमुख छात्र कल्याण योजना का नाम बदलने का फैसला लिया है। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब ‘पंडित जवाहरलाल नेहरू उत्कर्ष योजना’ को ‘सीएम अनुसूचित जाति तथा जनजाति विद्यार्थी उत्कर्ष योजना’ के नाम से संचालित किया जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्षी कांग्रेस ने योजना का नाम बदलने पर सवाल खड़े किए हैं, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक और जनहित से जुड़ा निर्णय बता रही है।
योजना के नाम परिवर्तन को लेकर आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकार भाजपा की है और जनता के हित में फैसले लेने का अधिकार भी सरकार को है। उन्होंने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि पार्टी को सरकार को ज्ञान देने की आवश्यकता नहीं है। मंत्री नेताम ने कहा कि राज्य सरकार सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय ले रही है और आगे भी जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाएगा। उन्होंने कांग्रेस पर परिवारवाद की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी आज भी नेहरू-गांधी परिवार की सोच से बाहर नहीं निकल पाई है।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना का केवल नाम बदला गया है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं और लाभों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। योजना का मूल उद्देश्य मेधावी विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रोत्साहित करना ही रहेगा। राज्य में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई योजनाओं, संस्थानों और कार्यक्रमों के नाम बदलने को लेकर राजनीतिक बहस होती रही है। अब नेहरू उत्कर्ष योजना के नाम परिवर्तन ने भी इस बहस को नया मुद्दा दे दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विषय सत्ता और विपक्ष के बीच बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।