मानस दर्शन जीवन अर्पण का नाम इंडियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज, छत्तीसगढ़ को मिली राष्ट्रीय पहचान

मानस दर्शन जीवन अर्पण का नाम इंडियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज, छत्तीसगढ़ को मिली राष्ट्रीय पहचान

दीपक गुहा के नेतृत्व में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और श्रीरामचरितमानस के प्रचार-प्रसार को मिली ऐतिहासिक उपलब्धि, राज्य और केंद्र से सम्मान की उठी मांग

दुर्ग । भारतीय संस्कृति, सनातन सभ्यता और श्रीरामचरितमानस के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित संस्था मानस दर्शन जीवन अर्पण, छत्तीसगढ़ ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। संस्था का नाम वर्ष 2026 के इंडियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। इस उपलब्धि से संस्था के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ में हर्ष का माहौल है। माँ भद्रकाली मानस संघ के जिला अध्यक्ष एवं मानस दर्शन के संयोजक डी.एल. सिन्हा ने बताया कि संस्था के प्रमुख दीपक गुहा के दूरदर्शी नेतृत्व में कोरोना काल से लगातार ऑनलाइन माध्यमों के जरिए भारतीय संस्कृति, सनातन सभ्यता, श्रीरामचरितमानस, आध्यात्मिक चेतना तथा सामाजिक-सांस्कृतिक जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए गए। इन अभियानों के माध्यम से देश-विदेश के लाखों लोगों तक भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का संदेश पहुंचाया गया।

उन्होंने कहा कि इंडियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज यह उपलब्धि केवल संस्था की सफलता नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और सनातन संस्कृति के लिए गौरव का विषय है। यह सम्मान संस्था के समर्पण, संगठन क्षमता, सतत सेवा और वर्षों की साधना का परिणाम है। डी.एल. सिन्हा ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन से मांग की कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक जनजागरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दीपक गुहा को राज्य के प्रतिष्ठित ‘दाऊ मंदराजी सम्मान’ से सम्मानित किया जाए। साथ ही भारत सरकार से भी उन्हें ‘पद्मश्री’ सम्मान के लिए अनुशंसित करने की मांग की गई। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान देने वाले ऐसे समर्पित व्यक्तित्वों का सम्मान न केवल समाज को प्रेरित करेगा, बल्कि प्रदेश और देश की सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान दिलाएगा। संस्था की इस उपलब्धि पर मानस दर्शन दुर्ग जिले से श्री के के सिन्हा, पुनेश्वर साहू युवा स्वर, हितेंद्र साहू, संदीप ठाकुर, दीदी माँ नूतन साहू, सरस्वती साहू ने कहा हैं कि यह उपलब्धि भारतीय संस्कृति के संरक्षण और जनजागरण के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

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